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सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: 6 की मौत, CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर, आसपास के हॉस्टलों पर भी उठे सवाल

by न्यूज डेस्क

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत के अचानक ढहने से राजधानी में हड़कंप मच गया। PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इस इमारत के जमींदोज होने से अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 11 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है। हादसे का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत गिरने से ठीक पहले का खौफनाक मंजर दिखाई दे रहा है।

कुछ सेकेंड में ढह गई पूरी इमारत

CCTV फुटेज में नजर आता है कि इमारत के नीचे एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी छोटी-सी दुकान लगाकर बैठे हुए थे। अचानक ऊपर से धूल और मलबा गिरना शुरू होता है। खतरा महसूस होते ही बुजुर्ग वहां से भागकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते हैं। इसके कुछ ही सेकेंड बाद पूरी इमारत भरभराकर नीचे आ गिरती है। देखते ही देखते आसपास का इलाका धूल के घने गुबार में ढक जाता है। हादसे की भयावहता इस फुटेज में साफ दिखाई देती है। 

हादसे में 6 लोगों की मौत

मोती बाग के पास सत्य निकेतन में हुए इस हादसे में अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है। राहत एवं बचाव टीमों ने 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिनमें छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं। घटनास्थल पर NDRF, CATS एंबुलेंस, दिल्ली पुलिस और प्रशासन की कई टीमें मौजूद हैं। भारी मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है।

AIIMS ने क्या बताया?

AIIMS की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, JPN एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सत्य निकेतन हादसे से घायल 10 मरीजों को लाया गया था। इनमें से 5 मरीजों को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित किया गया। वहीं, गंभीर रूप से घायल एक अन्य मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह मृतकों की संख्या 6 हो गई। तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। इनमें एक घायल की हाथ-पैर की सर्जरी भी की गई है। वहीं, एक मरीज को मामूली चोटें आई थीं और ऑब्जर्वेशन के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

पुलिस को पहले मिली थी बिल्डिंग गिरने की सूचना

एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे पुलिस को PCR कॉल के जरिए इमारत गिरने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और शुरुआती कार्रवाई करते हुए कुछ छात्रों को मलबे से बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। बाद में रेस्क्यू और जांच के दौरान पता चला कि मलबे के नीचे और भी लोग दबे हुए हैं। इसके बाद बचाव अभियान को और तेज किया गया। 

आसपास के हॉस्टलों की सुरक्षा भी सवालों के घेरे में

सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास संचालित हो रहे दूसरे हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हादसे वाली इमारत से करीब 70 से 80 मीटर की दूरी पर स्थित एक हॉस्टल को लेकर आरोप हैं कि वहां आने-जाने के लिए बेहद संकरा रास्ता है। बताया जा रहा है कि बाहर निकलने वाले रास्ते पर लोहे का गेट लगा है और आसपास बिजली के तार भी असुरक्षित तरीके से लटकते दिखाई देते हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 मीटर की दूरी पर इसी कंपनी से जुड़ा एक और पांच मंजिला हॉस्टल बताया जा रहा है। वहां भी प्रवेश द्वार के आसपास बिजली के खुले और उलझे तार सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इलाके में जहां सीमित मंजिलों वाली इमारतों की अनुमति है, वहां चार से पांच मंजिला निर्माण कैसे संचालित हो रहे हैं और छात्रों से भारी किराया वसूला जा रहा है। 

ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था रेनोवेशन, मालिक पर FIR

पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हादसे के समय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर रेनोवेशन का काम चल रहा था। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान पिलर और दीवारों के साथ छेड़छाड़ की गई, जिससे इमारत की संरचना कमजोर हुई और वह अचानक ढह गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में मकान मालिक हरिराम बंसल समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, हरिराम बंसल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है। आरोपी की पासपोर्ट संबंधी जानकारी पुलिस के पास मौजूद है। मामले में BNS की धारा 105, 290 और 125(a) के तहत कार्रवाई की गई है। 

आरोपी मकान मालिक की तलाश में छापेमारी

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी मकान मालिक की तलाश तेज कर दी है। साउथ कैंपस थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की कई टीमें दिल्ली-NCR के अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस की टीमें गुरुग्राम समेत कई स्थानों पर आरोपी की तलाश कर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि हरिराम बंसल अपने घर से फरार है। जांच एजेंसियां उसके रिश्तेदारों और करीबी लोगों से भी जानकारी जुटा रही हैं। 

CM रेखा गुप्ता समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे

हादसे की जानकारी मिलते ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मंत्री कपिल मिश्रा, स्थानीय विधायक और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री AIIMS ट्रॉमा सेंटर भी पहुंचीं, जहां उन्होंने हादसे में घायल और बचाए गए छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और पीड़ितों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए। 7 सितंबर को दोबारा घटनास्थल का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आसपास की जर्जर इमारतों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से हादसे से सटी इमारत को तत्काल गिराए जाने की बात कही। 

MCD ने पड़ोसी इमारत खाली कराने का नोटिस दिया

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम भी हरकत में आया है। MCD ने हादसे वाली इमारत के ठीक बगल स्थित एक अन्य भवन को लेकर प्रीकॉशनरी नोटिस जारी किया है। नोटिस के मुताबिक, DMC Act 1957 की धारा 348 के तहत मकान नंबर 13 की इमारत को खतरनाक और जर्जर स्थिति में पाया गया है। निगम ने आशंका जताई है कि यह ढांचा वहां रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास के लोगों और राहगीरों के लिए भी खतरा बन सकता है। MCD ने मालिक और वहां रहने वाले लोगों को तीन दिन के भीतर इमारत को खुद खाली कर ध्वस्त करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर निगम की ओर से कार्रवाई की जाएगी और ध्वस्तीकरण का खर्च मकान मालिक से वसूला जाएगा। 

ABVP ने MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की

हादसे को लेकर छात्र संगठन ABVP ने भी विरोध दर्ज कराया है। ABVP की नेशनल सोशल मीडिया कन्वीनर प्रेरणा भारद्वाज ने MCD की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता हादसे के बाद से मौके पर मौजूद हैं और छात्रों की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है। ABVP का कहना है कि जब तक मलबे में फंसे आखिरी छात्र को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक वे मौके पर डटे रहेंगे। सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के छात्र इलाकों में संचालित PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था, अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच का फोकस इस बात पर भी है कि आखिर इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा में कहां चूक हुई और जिम्मेदारी किसकी थी।


‘किताबों और सिलेबस से बाहर निकलें, बच्चों की जिंदगी में उतरें’, PM मोदी की शिक्षकों से खास अपील

by न्यूज डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से अपील की है कि वे बच्चों को सिर्फ किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित होकर न पढ़ाएं, बल्कि उनके जीवन, रुचियों, परेशानियों और प्रतिभाओं को भी समझने की कोशिश करें। शिक्षक दिवस से पहले प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों के साथ बातचीत के दौरान शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर चर्चा की। लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बातचीत में पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने या परीक्षा की तैयारी कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें बच्चों के जीवन से जुड़कर उनकी सोच और जरूरतों को समझना होगा।

‘किताबों और पाठ्यक्रम से बाहर निकलना होगा’

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को समझने के लिए सिर्फ किताबों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी में उनकी भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और खुलेपन को बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। पीएम मोदी के मुताबिक, बच्चों में सीखने और सवाल पूछने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को खत्म नहीं होने देना चाहिए।

पढ़ाई में कमजोर बच्चे की प्रतिभा पहचानें

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से यह भी पूछा कि क्या वे उन बच्चों की छिपी खूबियों को पहचानने का प्रयास करते हैं, जो पढ़ाई में अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। पीएम मोदी ने कहा कि जरूरी नहीं कि हर बच्चा पढ़ाई में अव्वल हो। हर बच्चे में कोई न कोई खास क्षमता या प्रतिभा हो सकती है। शिक्षक की भूमिका उस प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने और सही दिशा देने में महत्वपूर्ण हो जाती है। एक शिक्षक ने बताया कि हर बच्चे की क्षमताएं, चुनौतियां और सीखने का तरीका अलग होता है। ऐसे में शिक्षकों को बच्चों की व्यक्तिगत खूबियों को समझकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए। शिक्षकों ने यह भी बताया कि बच्चों के आत्मविश्वास और कौशल को बढ़ाने के लिए कक्षा के अलावा अलग-अलग गतिविधियां कराई जाती हैं।

अच्छा वक्ता बनने के लिए क्या जरूरी?

बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने एक शिक्षक से प्रभावी तरीके से बोलने और अच्छा वक्ता बनने के बारे में भी सवाल किया। शिक्षक ने बताया कि बेहतर वक्तृत्व के लिए आत्मविश्वास के साथ लगातार अभ्यास करना जरूरी है। इस चर्चा के जरिए बच्चों में संवाद कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी चिंता

प्रधानमंत्री ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने से बचाने के लिए खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कामों की ओर प्रेरित करने को कहा। पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है, जिनसे उनका आत्मविश्वास बढ़े और सामाजिक कौशल विकसित हो। स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ ऐसी गतिविधियों को भी महत्व देने की जरूरत है।

कैंसर जागरूकता और नशे के खिलाफ अभियान पर चर्चा

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत में शिक्षा से जुड़े विषयों के अलावा सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। एक शिक्षिका ने महिलाओं में स्तन कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाने के अपने प्रयासों के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय रहते जागरूकता और जांच के जरिए महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर उचित चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसके अलावा छात्रों में नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि उन्हें बच्चों के व्यवहार और उनकी गतिविधियों में आने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाला नहीं, मार्गदर्शक भी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल सिलेबस पूरा कराने और परीक्षा की तैयारी कराने तक सीमित नहीं है। एक शिक्षक को बच्चों की क्षमताओं, रुचियों और चुनौतियों को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों में बातचीत करने की क्षमता, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास जैसे कौशल विकसित करने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि देश के बच्चों का भविष्य संवारने में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।


स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचा हिंदू रक्षा दल, FIR पर उठाए सवाल

by न्यूज डेस्क

दिल्ली पुलिस की ओर से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज की गई FIR को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब हिंदू रक्षा दल के सदस्य स्वतंत्र के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन ने FIR को गलत बताते हुए मामले की जांच और कार्रवाई के तरीके पर आपत्ति जताई। हिंदू रक्षा दल के लोगों का कहना है कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ जिस आधार पर मामला दर्ज किया गया है, वह उचित नहीं है। संगठन ने पुलिस से मामले को लेकर अपना पक्ष रखा और FIR की कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग की।

POCSO एक्ट के तहत भी दर्ज हुई फिर

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत एक अलग FIR दर्ज की थी। पुलिस के मुताबिक, एक नाबालिग की ओर से ऑनलाइन धमकी मिलने की शिकायत सामने आई थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम भी शामिल बताया गया है। पुलिस ने इससे पहले दर्ज की गई FIR में SC/ST एक्ट से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी हैं। इसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

पुलिस कार्रवाई को लेकर संगठन ने जताई आपत्ति

हिंदू रक्षा दल का कहना है कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल हैं। संगठन के सदस्य इसी मुद्दे को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा। फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से दर्ज FIR और लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। वहीं, स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में संगठन के थाने पहुंचने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।


दिल्ली-NCR में बदला मौसम का मिजाज, तेज बारिश से राहत, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

by न्यूज डेस्क

दिल्ली-NCR में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ली। राजधानी के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई, जिससे उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए जारी अलर्ट को बढ़ाकर रेड अलर्ट कर दिया है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है। लगातार बारिश होने पर दिल्ली-NCR के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, वहीं कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक की रफ्तार भी प्रभावित होने की आशंका है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश

दिल्ली के अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के कई हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई। IMD के अनुमान के मुताबिक राजधानी के ज्यादातर इलाकों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर 50 से 100 मिलीमीटर तक भारी बारिश होने की संभावना है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि तेज झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, शुक्रवार को जन्माष्टमी के कारण स्कूल-कॉलेज और कई दफ्तर बंद रहने से सामान्य दिनों के मुकाबले सड़कों पर वाहनों का दबाव कम रहने की उम्मीद है।

उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों में भी बारिश का असर

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के आसपास निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके अलावा मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय बनी हुई है। यही वजह है कि उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। 

राजस्थान में भी भारी बारिश का अनुमान

राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भी मौसम विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। बीते 24 घंटों में पूर्वी राजस्थान के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई। सवाई माधोपुर के खंडार में 130 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस अवधि में राज्य में सबसे अधिक रही। इसके अलावा अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बीच दिल्ली-NCR समेत प्रभावित इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और मौसम से जुड़े ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।


सोनिया गांधी की किताब पर बदला प्रकाशक, अब हार्पर कॉलिन्स भारत में करेगा प्रकाशित

by न्यूज डेस्क

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर चल रहा प्रकाशन विवाद अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। किताब के भारत में प्रकाशन की जिम्मेदारी अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया संभालेगा। प्रकाशक ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। किताब की वैश्विक रिलीज 10 नवंबर को प्रस्तावित है। हार्पर कॉलिन्स ने इसे मौजूदा दौर की चर्चित और बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरण पुस्तकों में शामिल बताया है। किताब में सोनिया गांधी के निजी जीवन से लेकर भारतीय राजनीति में उनके लंबे सफर तक के कई अहम पहलुओं को जगह दी गई है।

इटली के बचपन से भारतीय राजनीति तक का सफर

सोनिया गांधी की यह किताब उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को सामने रखेगी। इसमें युद्ध के बाद के इटली में बीता उनका बचपन, भारत आने का फैसला, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ विवाह और इसके बाद भारतीय राजनीति के केंद्र में बिताए गए दशकों का जिक्र होगा। प्रकाशक के मुताबिक, संस्मरण में भारत के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों को सोनिया गांधी के व्यक्तिगत अनुभवों और नजरिए से समझने का अवसर भी मिलेगा।

पेंगुइन से शुरू हुआ था प्रकाशन विवाद

किताब को लेकर विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका स्थित Alfred A. Knopf, जो Penguin Random House का हिस्सा है, ने इसके 10 नवंबर को वैश्विक प्रकाशन की घोषणा की। हालांकि, इसके बाद Penguin Random House India ने साफ किया कि भारत में किताब का प्रकाशन उसकी ओर से नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत में किताब प्रकाशित करने को लेकर पांडुलिपि के कुछ हिस्सों में संपादकीय बदलाव और कुछ अंश हटाने को लेकर चर्चा हुई थी। सोनिया गांधी की टीम इन बदलावों पर सहमत नहीं हुई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रकाशन को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

मोदी, RSS और चीन से जुड़े हिस्सों पर भी उठा सवाल

विवाद के दौरान कांग्रेस नेताओं की ओर से आरोप लगाए गए कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और भारत-चीन संबंधों से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाने का दबाव था। कांग्रेस नेताओं ने इसे बाहरी दबाव से जोड़कर भी सवाल उठाए। हालांकि, Penguin Random House India ने इन आरोपों को खारिज किया था। प्रकाशक का कहना था कि भारत में किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किसी बाहरी दबाव की वजह से नहीं लिया गया। साथ ही, उसने यह स्वीकार किया था कि प्रकाशन को लेकर बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया के साथ करार के बाद किताब के भारत में पाठकों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। सोनिया गांधी की निजी जिंदगी और भारतीय राजनीति के उनके लंबे अनुभवों पर आधारित यह संस्मरण रिलीज से पहले ही राजनीतिक और साहित्यिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।


कृष्ण जन्माष्टमी आज, आधी रात में होगा कान्हा का जन्म, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और खास उपाय

by न्यूज डेस्क

देशभर में आज भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट और झांकियों की तैयारी है, वहीं घरों में भी भक्त लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना कर अपना व्रत पूरा करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इसे कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी और कृष्ण जयंती जैसे नामों से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी दिन श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर अवतार लिया था।

रात में इस समय होगी श्रीकृष्ण की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात 12 बजे के आसपास की जाती है। इस बार रोहिणी नक्षत्र रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भक्त मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर उनका अभिषेक और श्रृंगार कर सकते हैं। जन्म के समय भगवान की आरती और विशेष भोग लगाने की परंपरा है।

जन्माष्टमी पूजा में ये सामग्री रखें

लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार के लिए बाल कृष्ण की प्रतिमा, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख की जरूरत होती है। इसके अलावा पूजा के लिए चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और फूल रखे जाते हैं। भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत तैयार किया जाता है। इसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल होते हैं। भोग के लिए माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाई रखी जाती है। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल अर्पित करने की भी परंपरा है।

ऐसे करें लड्डू गोपाल का अभिषेक और श्रृंगार

जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर उसे सजाएं। लड्डू गोपाल के लिए सुंदर झूला भी तैयार करें। रात में जन्म मुहूर्त के समय सबसे पहले भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से श्रृंगार करें। श्रृंगार पूरा होने के बाद लड्डू गोपाल को झूले में विराजमान करें और उन्हें झूला झुलाएं। इसके बाद माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल चढ़ाएं। अंत में धूप-दीप जलाकर श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।

जन्माष्टमी पर करें इन मंत्रों का जाप

ॐ कृष्णाय नमः।

ॐ देवकीनंदनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः।

ॐ गोकुलनाथाय नमः।

ॐ नमो भगवते श्रीगोविंदाय नमः।

जन्माष्टमी पर किए जाते हैं ये उपाय

केसर वाले दूध से अभिषेक- धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्मोत्सव के बाद लड्डू गोपाल का केसर मिले दूध से अभिषेक करना शुभ होता है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। पान का पत्ता अर्पित करें- जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण को पान का पत्ता चढ़ाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि अगले दिन इस पत्ते पर रोली से श्रीयंत्र बनाकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं। ध्यान दें- पूजा के मुहूर्त और तिथि में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।


‘बम’ की चिट्ठी मिलने से मचा हड़कंप, को-पायलट पर भी जांच की आंच; अहमदाबाद में Air India Express की इमरजेंसी लैंडिंग का मामला

by न्यूज डेस्क

अहमदाबाद एयरपोर्ट पर Air India Express की दमाम-दिल्ली फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। 31 अगस्त को विमान में बम से जुड़ी धमकी वाली चिट्ठी मिलने के बाद फ्लाइट को अहमदाबाद में उतारा गया था। अब पुलिस जांच में एयरलाइंस की को-पायलट को लेकर भी संदेह सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक को-पायलट की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीमें पूरे मामले से जुड़े सबूतों की जांच में जुटी हैं।

विमान में मिली थी धमकी वाली चिट्ठी

यह मामला 31 अगस्त का है, जब दमाम से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली Air India Express की फ्लाइट में बम को लेकर धमकी भरा संदेश मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए विमान को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान के अहमदाबाद पहुंचने के बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। पुलिस ने फ्लाइट में मौजूद लोगों से पूछताछ की और यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि धमकी वाली चिट्ठी विमान के भीतर कैसे पहुंची।

को-पायलट पर क्यों हुआ शक?

जांच के दौरान पुलिस सूत्रों के हवाले से को-पायलट पर भी संदेह जताए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, केवल शक के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमकी भरे संदेश के पीछे कौन था और इसे विमान तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया क्या रही। पुलिस और FSL की टीमें चिट्ठी समेत मामले से जुड़े अन्य संभावित सबूतों की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि धमकी किसने दी और उसका मकसद क्या था।
Air India Express ने क्या कहा?

Air India Express ने इस मामले में कहा है कि वह सुरक्षा से जुड़े इस घटनाक्रम की जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है। एयरलाइन ने यात्रियों, क्रू और फ्लाइट ऑपरेशन की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यवहार की निंदा की है। एयरलाइन के मुताबिक, जांच एजेंसियों के निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले में जरूरी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और FSL की जांच जारी है और पूरे मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।


अभिनंदन वर्तमान ने छोड़ी वायुसेना की नौकरी, अब कमर्शियल पायलट बनकर उड़ाएंगे यात्री विमान

by न्यूज डेस्क

2019 में पाकिस्तान के F-16 को मार गिराने और करीब 60 घंटे तक पाकिस्तानी हिरासत में रहने के बाद देशभर में चर्चित हुए अभिनंदन वर्तमान ने भारतीय वायुसेना को अलविदा कह दिया है। करीब 20 साल तक एयरफोर्स में सेवा देने वाले पूर्व ग्रुप कैप्टन अब कमर्शियल एविएशन में अपनी नई पारी शुरू कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनंदन ने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना से रिटायरमेंट लिया था। इसके कुछ महीनों बाद अगस्त में उन्होंने गोवा की निजी एयरलाइन फ्लाई91 का हिस्सा बनकर यात्री विमान उड़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

2019 में मिग-21 से भरी थी आखिरी नहीं, यादगार उड़ान

अभिनंदन का नाम 27 फरवरी 2019 को भारत-पाकिस्तान के बीच हुई हवाई झड़प के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। उस समय वह भारतीय वायुसेना के MiG-21 बाइसन पर तैनात थे। हवाई मुकाबले के दौरान अभिनंदन ने पाकिस्तानी F-16 को निशाना बनाया। इसी कार्रवाई के दौरान उनका MiG-21 भी मिसाइल की चपेट में आ गया। विमान के क्षतिग्रस्त होने के बाद उन्होंने इजेक्ट किया और पैराशूट से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के इलाके में जा पहुंचे, वहां पाकिस्तानी सेना ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया।

60 घंटे बाद हुई भारत वापसी

अभिनंदन को करीब ढाई दिन तक पाकिस्तान की हिरासत में रखा गया। उनकी रिहाई को लेकर भारत की ओर से लगातार दबाव बनाया गया। आखिरकार 1 मार्च 2019 को उन्हें अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत वापस लाया गया। भारत लौटने के बाद अभिनंदन की बहादुरी और संयम की खूब चर्चा हुई। उनकी सैन्य सेवा के सम्मान में उन्हें 2021 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

2037 तक रह सकते थे एयरफोर्स में

अभिनंदन की उम्र को देखते हुए उनका सामान्य रिटायरमेंट वर्ष 2037 बताया जा रहा था। यानी वह अभी कई वर्षों तक वायुसेना में अपनी सेवाएं जारी रख सकते थे। हालांकि, उन्होंने करीब दो दशक की सैन्य सेवा के बाद इस साल मार्च में एयरफोर्स छोड़ने का फैसला किया। अब उनका अनुभव फाइटर जेट के बजाय कमर्शियल विमान के कॉकपिट में नजर आएगा। फ्लाई91 के साथ जुड़ने के बाद अभिनंदन के करियर ने एक नया मोड़ लिया है—जहां अब उनका मिशन लड़ाकू विमानों के जरिए दुश्मन का मुकाबला करना नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना होगा।


हवा में बिगड़ी क्रू मेंबर की तबीयत, दोहा से बेंगलुरु जा रही IndiGo फ्लाइट मस्कट डायवर्ट

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: दोहा से बेंगलुरु जा रही IndiGo की फ्लाइट को गुरुवार को अचानक मस्कट डायवर्ट करना पड़ा। उड़ान के दौरान एक क्रू मेंबर की तबीयत बिगड़ने के बाद विमान में मेडिकल इमरजेंसी घोषित की गई। यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को देखते हुए पायलट ने विमान को ओमान की राजधानी मस्कट ले जाने का फैसला किया। यह घटना IndiGo की फ्लाइट 6E 1302 में हुई, जो 3 सितंबर को दोहा से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई थी। एयरलाइन के मुताबिक, उड़ान के बीच एक क्रू मेंबर को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ी। इसके बाद विमान का रूट बदलकर मस्कट कर दिया गया।

मस्कट एयरपोर्ट पर कराया गया इलाज

मस्कट एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद मेडिकल टीम ने बीमार क्रू मेंबर की जांच की और जरूरी उपचार दिया। IndiGo ने बताया कि फिलहाल उनकी हालत बेहतर है। मेडिकल इमरजेंसी के चलते विमान के मस्कट में रुकने से यात्रियों को भी कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा। एयरलाइन की ओर से यात्रियों के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई और उन्हें फ्लाइट की स्थिति के बारे में लगातार जानकारी दी गई।

यात्रियों को बेंगलुरु पहुंचाने की तैयारी

IndiGo ने यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक विमान और नए क्रू की व्यवस्था की है। हालांकि, एयरलाइन की ओर से अभी बेंगलुरु पहुंचने के समय का नया अनुमान जारी नहीं किया गया है। एयरलाइन ने कहा कि फ्लाइट को मस्कट डायवर्ट करने का फैसला पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। IndiGo ने रूट बदलने के कारण यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए उनसे माफी भी मांगी है। ऐसे मामलों में विमान को नजदीकी उपयुक्त एयरपोर्ट पर उतारना सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होता है, ताकि बीमार यात्री या क्रू मेंबर को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।


OBC क्रीमी लेयर मामले में केंद्र को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, पुराने आदेश पर रोक से इनकार

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में क्रीमी लेयर के निर्धारण को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 11 मार्च के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए केंद्र की स्पष्टीकरण याचिका पर सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को होगी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से अदालत से पिछले फैसले के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस स्तर पर ऐसा कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।

सिर्फ माता-पिता की सैलरी से तय नहीं होगी क्रीमी लेयर

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को दिए अपने फैसले में कहा था कि OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय या वेतन को आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत के मुताबिक, किसी परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करते समय माता-पिता का पद, उनकी सामाजिक स्थिति और नौकरी की श्रेणी जैसे अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इस व्यवस्था का असर खास तौर पर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनके माता-पिता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों या निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। अदालत की व्यवस्था के अनुसार, केवल अधिक वेतन होने के आधार पर उनके बच्चों को OBC आरक्षण के लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता।
केंद्र ने UPSC 2025 को लेकर जताई चिंता

केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण याचिका दाखिल कर फैसले को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला दिया है। सरकार की मुख्य चिंता UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 की प्रक्रिया को लेकर है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि UPSC की ओर से अनुशंसित 958 उम्मीदवारों के सर्विस एलोकेशन की प्रक्रिया पुराने नियमों के आधार पर अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। केंद्र का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के मार्च के फैसले को पिछली तारीख से लागू किया गया, तो इससे मेरिट लिस्ट, कैडर आवंटन और ट्रेनिंग की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सरकार के मुताबिक, इसका असर केवल केंद्र सरकार की भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही विभिन्न भर्तियों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

17 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अपने पुराने आदेश के अमल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अब केंद्र सरकार की स्पष्टीकरण याचिका पर अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन अदालत यह तय कर सकती है कि मार्च के फैसले को लागू करने से जुड़ी केंद्र की व्यावहारिक चिंताओं पर क्या रुख अपनाया जाए।


‘नेपाल को फिर खड़ा करेंगे’, तबाही के बीच पहुंचे सोनू सूद, बोले- दुनिया भर के लोग मदद के लिए आगे आएं

by न्यूज डेस्क

नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद तबाही से जूझ रहे इलाकों का जायजा लेने बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद खुद मौके पर पहुंचे। बाढ़ और मलबे से प्रभावित क्षेत्रों में हालात देखकर उन्होंने लोगों से नेपाल की मदद के लिए आगे आने की अपील की। सोनू सूद ने कहा कि वहां की स्थिति बेहद गंभीर है और जितनी मदद की जरूरत है, उसके मुकाबले अभी मदद के लिए आगे आने वाले हाथ कम हैं। सोनू सूद ने ‘आजतक’ से बातचीत में कहा कि मौके पर पहुंचकर ही इस आपदा के असर का सही अंदाजा लगाया जा सकता है। कई लोगों के घर तबाह हो चुके हैं और बड़ी संख्या में परिवार मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में सिर्फ नेपाल के लोगों को ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को भी मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सभी मिलकर प्रयास करें, ताकि नेपाल को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा किया जा सके।

‘अभी भी पानी का असर साफ दिखाई दे रहा है’

सोनू सूद ने आपदा प्रभावित क्षेत्र के हालात बताते हुए कहा कि घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी वहां तबाही के निशान साफ नजर आ रहे हैं। जिस जगह वह मौजूद थे, वहां पानी के बहाव और मलबे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा के समय स्थिति कितनी भयावह रही होगी। उन्होंने बताया कि पानी का स्तर उस समय काफी ऊपर तक पहुंच गया था और पूरा इलाका जलमग्न हो गया होगा। कई जगहों पर मलबा काफी ऊंचाई तक जमा है। इससे साफ है कि आपदा के कई दिन बीत जाने के बावजूद प्रभावित लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

‘पता लगा रहे हैं कि लोगों को किस चीज की जरूरत है’

नेपाल में राहत और मदद को लेकर अपनी योजना पर सोनू सूद ने कहा कि उनकी टीम और उनके सहयोगी लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं। उनकी कोशिश है कि पहले यह समझा जाए कि लोगों को तत्काल किस तरह की सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई दोस्त और सहयोगी भी मौके पर पहुंच रहे हैं और मिलकर हालात का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत अभियान से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। सोनू सूद का कहना है कि केवल मौके पर पहुंचना ही काफी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आएं और प्रभावित परिवारों की मदद करें, ताकि उन्हें जल्द से जल्द सामान्य जिंदगी की ओर लौटने में मदद मिल सके।

एक हफ्ते बाद भी जारी है राहत और बचाव अभियान

दरअसल, नेपाल में आई इस आपदा के बाद कई इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। पानी और मलबे के तेज बहाव ने कई घरों, बाजारों और कस्बों को प्रभावित किया। नेपाल-चीन सीमा के पास कस्टम और इमिग्रेशन क्षेत्र से लेकर आसपास के इलाकों तक आपदा का असर देखने को मिला। इसके बाद पानी और मलबा निचले इलाकों की ओर बढ़ता गया। रास्ते में आने वाले कई इलाकों में घरों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए और कई लोगों के लापता होने की खबर सामने आई। सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है, जो अभी भी मलबे या प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए बताए जा रहे हैं। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। भारत समेत कई देशों की टीमें और विशेषज्ञ राहत-बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं। बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों तक जल्द पहुंचना बेहद जरूरी है। ऐसे हालात के बीच सोनू सूद ने लोगों से अपील की है कि वे नेपाल के प्रभावित लोगों की मदद के लिए अपनी क्षमता के अनुसार आगे आएं। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही नेपाल को इस बड़ी त्रासदी से उबरने में मदद मिल सकती है।


SCO Summit: आतंकवाद पर PM मोदी का दो टूक संदेश, बोले- ‘डबल स्टैंडर्ड’ की कोई जगह नहीं, पाकिस्तान को भी साफ संकेत

by न्यूज डेस्क

SCO Summit Latest Update: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन चल रहा है। इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिए उन देशों को स्पष्ट संदेश दिया, जो आतंकवाद को अपनी रणनीतिक नीति के तौर पर इस्तेमाल करते हैं या आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर जोर दिया।

आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम पर प्रहार की जरूरत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद की चुनौती सिर्फ आतंकी हमलों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे मौजूद वित्तीय नेटवर्क, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियां और सुरक्षित ठिकानों को भी निशाना बनाना जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करने की अपील की। पीएम का संदेश साफ था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी प्रभावी हो सकती है, जब उसके पूरे इकोसिस्टम को एक साथ खत्म किया जाए।

SCO मंच से पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन आतंकवाद को लेकर दिया गया उनका संदेश काफी स्पष्ट माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाते हैं और आतंकियों को समर्थन या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि ऐसी रणनीति लंबे समय तक स्वीकार नहीं की जा सकती। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की वकालत करता रहा है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर पीएम मोदी का यह रुख भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है।

शी जिनपिंग से मुलाकात, साथ दिखे मोदी

SCO सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और बैठक स्थल पर एक साथ जाते हुए नजर आए। भारत और चीन के बीच सीमा समेत कई अहम मुद्दे रहे हैं, ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन से जुड़ी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की।

पुतिन से भी हुई अहम द्विपक्षीय बैठक

SCO Summit से इतर प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस संबंधों, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और विभिन्न वैश्विक संघर्षों पर चर्चा हुई। बैठक में पीएम मोदी ने युद्ध और संघर्ष की मौजूदा परिस्थितियों के बीच स्थायी शांति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही विवादों का समाधान निकाला जा सकता है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर कई बड़े भू-राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं, मोदी-पुतिन मुलाकात को भारत की संतुलित विदेश नीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

SCO Summit में भारत की तीन बड़ी प्राथमिकताएं

बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं में सुरक्षा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग प्रमुख हैं। भारत का जोर इस बात पर है कि यूरेशियाई क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाया जाए, लेकिन साथ ही राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता न हो। इस सम्मेलन की थीम ‘SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर’ रखी गई है। यह बैठक संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित की जा रही है।
कई देशों के नेताओं से पीएम मोदी की मुलाकात

किर्गिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इनमें रूस, ईरान, किर्गिज गणराज्य और आर्मेनिया के नेताओं के साथ हुई बैठकें शामिल हैं। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने बिश्केक में आयोजित छठे विश्व नोमैड खेलों के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया। SCO सम्मेलन में चीन, रूस, ईरान समेत संगठन के सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।


7.8% GDP ग्रोथ के बीच PM मोदी का स्वदेशी मंत्र, बोले- जरूरत न हो तो सोना न खरीदें, विदेश में शादी से भी बचें

by न्यूज डेस्क

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7.8 फीसदी की विकास दर दर्ज की है। मजबूत GDP आंकड़ों से उत्साहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक रफ्तार की सराहना करते हुए इसे आत्मविश्वास बढ़ाने वाला संकेत बताया। साथ ही उन्होंने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में कुछ अहम अपील भी की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने देश की 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ को उत्साह बढ़ाने वाला आंकड़ा बताया और कहा कि इस गति को आगे भी बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

पीएम मोदी ने दिया 'स्वदेशी' का मंत्र

GDP के आंकड़ों पर खुशी जताने के साथ ही प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ऐसी चीजों पर खर्च कम करने की अपील की, जिनसे विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। उन्होंने खास तौर पर जरूरत नहीं होने पर सोना खरीदने से बचने की बात कही। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय परिवारों को शादी समारोह के लिए विदेश जाने के बजाय देश में ही आयोजन करने पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह देश की अर्थव्यवस्था में पैसा बना रहेगा और घरेलू कारोबार को भी फायदा मिलेगा। इसके अलावा उन्होंने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने की अपील करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता के जरिए ही 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इसके लिए देशवासियों को मिलकर संकल्प लेने की जरूरत है।

7.8% GDP ग्रोथ पर PM मोदी ने जताई खुशी

सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों और कई विशेषज्ञों की उम्मीदों से बेहतर बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक सेल्फी वीडियो में भी इस उपलब्धि का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों और नकारात्मक माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो के साथ GDP के आंकड़ों को लेकर उत्साह जताते हुए लिखा कि 7.8 फीसदी की ग्रोथ देश के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी लगातार 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य पर जोर देते रहे हैं। ताजा अपील में भी उन्होंने घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा के अनावश्यक खर्च को कम करने पर जोर दिया। उनका संदेश साफ है कि देश की आर्थिक वृद्धि को केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि आम लोगों की खरीदारी और खर्च से जुड़े फैसलों से भी मजबूती मिल सकती है।


पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, यूरेनियम सप्लाई समेत कई अहम समझौतों पर बनी सहमति

by न्यूज डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ पूरी हो गई। यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने वाले कई फैसले लिए गए। इनमें यूरेनियम की दीर्घकालिक सप्लाई को लेकर बनी सहमति को खास तौर पर अहम माना जा रहा है। वहीं, उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया।

पीएम मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ओली दाराजली डस्टलिक’ से सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी को अब तक मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 36 हो गई है।

यूरेनियम की सप्लाई पर बड़ा समझौता

यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारत लगातार अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और परमाणु ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में उज्बेकिस्तान से लंबे समय तक यूरेनियम की उपलब्धता भारत की परमाणु ऊर्जा योजनाओं को मजबूती दे सकती है।

सिस्टर सिटी और सिस्टर स्टेट को लेकर भी पहल

दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं रहा। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ‘सिस्टर सिटी’ और ‘सिस्टर स्टेट’ साझेदारी से जुड़े तीन समझौतों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि इन समझौतों को सिर्फ औपचारिक दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार कर ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिनका सीधा असर जमीन पर दिखाई दे।

‘न्यू ताशकंद’ के लिए GIFT City का मॉडल

बैठक में शहरी विकास और स्मार्ट सिटी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उज्बेकिस्तान इन दिनों ‘न्यू ताशकंद’ नाम से एक नए शहर को विकसित कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात की GIFT City का उदाहरण देते हुए इसे शहरी विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक उपयोगी मॉडल बताया। उन्होंने उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल को भारत आने का न्योता भी दिया, ताकि वे GIFT City की योजना, तकनीक और विकास प्रक्रिया को करीब से समझ सकें।

पहली बार 1 अरब डॉलर के पार पहुंचा व्यापार

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने भारत को ‘विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार पिछले साल 1 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच संयुक्त उद्यमों की संख्या में भी पिछले कुछ वर्षों में करीब सात गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग का संकेत माना जा रहा है।

भारत-उज्बेकिस्तान के बीच हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें

दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया गया है। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के मुताबिक, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच फिलहाल हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान परमाणु ऊर्जा, शहरी विकास, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहा। दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से इस यात्रा को अहम माना जा रहा है।


एक मंच पर मोदी-जिनपिंग-पुतिन! बिश्केक में SCO समिट, सुरक्षा से लेकर आतंकवाद तक इन मुद्दों पर मंथन

by न्यूज डेस्क

मध्य एशिया में आज दुनिया की नजरें किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पर टिकी हैं। यहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन शुरू हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। 31 अगस्त और 1 सितंबर को होने वाले SCO शिखर सम्मेलन को संगठन के लिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान SCO अपने गठन के 25 साल पूरे होने का अवसर मना रहा है। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों के अलावा व्यापार, ऊर्जा, परिवहन संपर्क और डिजिटल सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और यूक्रेन युद्ध के साथ बदलते वैश्विक समीकरणों का असर भी इस बैठक में देखने को मिल सकता है। ऐसे में एक ही मंच पर भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।

बिश्केक पहुंचे PM मोदी, हुआ भव्य स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा पूरी करने के बाद रविवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे। एयरपोर्ट पर किर्गिस्तान के कैबिनेट मंत्रियों के अध्यक्ष अदिलबेक कासिमालियेव ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी हुई। बिश्केक पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री का होटल में भी विशेष स्वागत किया गया। यहां ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ उनका अभिनंदन हुआ। प्रधानमंत्री ने ‘मां तुझे सलाम’ गीत पर योग प्रस्तुति देखी। इसके बाद भगवान शिव पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। उनके मुताबिक, सम्मेलन में SCO के 10 सदस्य देशों के अलावा 15 साझेदार और 2 पर्यवेक्षक देश भी क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए मौजूद रहेंगे।
सुरक्षा और आतंकवाद पर भारत का जोर

प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर SCO सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। भारत से रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि भारत क्षेत्र में सुरक्षा, संपर्क और विकास के अवसरों को बढ़ाने के पक्ष में है। भारत लंबे समय से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर चुनौती बताता रहा है। ऐसे में SCO के मंच से प्रधानमंत्री एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भारत का रुख मजबूती से रख सकते हैं।

शी जिनपिंग, पुतिन और शहबाज शरीफ भी मौजूद

SCO सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता यूरी उशाकोव के मुताबिक, पुतिन की शी जिनपिंग और मसूद पेजेश्कियन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत भी हो सकती है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी भी SCO बैठक से इतर कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकात कर सकते हैं। इनमें किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बैठकें अहम मानी जा रही हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है SCO सम्मेलन?

SCO भारत के लिए मध्य एशिया और यूरेशिया के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। सुरक्षा के अलावा ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे भारत के लिए खास महत्व रखते हैं। एक तरफ भारत रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखना चाहता है, वहीं चीन के साथ सीमा और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद भी हैं। ऐसे में मोदी, जिनपिंग और पुतिन का एक ही मंच पर होना सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर खास बना रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि बिश्केक में होने वाली बैठकों से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर क्या संदेश निकलता है।


रक्षाबंधन पर जशपुर की बहनों ने CM विष्णुदेव साय को बांधी राखी, पंडरीपानी में महतारी सदन की सौगात

जशपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले में महिलाओं के साथ पर्व मनाया। फरसाबहार विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी में आयोजित रक्षाबंधन एवं बहनों से संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने भी महिलाओं को उपहार देकर उनका सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पंडरीपानी में नवनिर्मित महतारी सदन का लोकार्पण किया। इसके अलावा गांव में कई विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री ने फरसाबहार और भेलवा में भी नए महतारी सदन के निर्माण की घोषणा की।

महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त का किया उल्लेख

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महतारी वंदन योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त जारी की गई है। इस किस्त के तहत 67 लाख से अधिक माताओं और बहनों के बैंक खातों में 631 करोड़ 38 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर परिवार, समाज और गांव की अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति प्रदेश के विकास का महत्वपूर्ण आधार है।

24.70 लाख रुपये से बने महतारी सदन का लोकार्पण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंडरीपानी में 24.70 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन का लोकार्पण किया। रक्षाबंधन के अवसर पर इसे क्षेत्र की महिलाओं को समर्पित किया गया। महतारी सदन में हॉल, किचन, स्टोर, कार्यालय कक्ष और दुकान संचालन के लिए अलग स्थान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सरकार के अनुसार, यह भवन महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण और स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जाएगा। प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों के दौरान 481 महतारी सदनों की स्वीकृति दी गई है।

महिलाओं के प्रशिक्षण और स्वरोजगार का केंद्र बनेगा महतारी सदन

सरकार की योजना के अनुसार महतारी सदन केवल एक भवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे महिलाओं की विभिन्न आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां स्व-सहायता समूहों की बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम, उत्पाद निर्माण और विपणन जैसी गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। इससे महिलाओं को कौशल विकास के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की भी योजना है।

पंडरीपानी में 64.49 लाख रुपये के विकास कार्य

मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत पंडरीपानी में कुल 64.49 लाख रुपये की लागत से जुड़े छह विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इन कार्यों में 24.70 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन और सिसरिंगा बस्ती में 10 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण शामिल है। इसके अलावा महलीटोली पहुंच मार्ग में 7.80 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड और 3.99 लाख रुपये की लागत से मंच निर्माण का कार्य भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने मुडराटोली से बलुआटोली पहुंच मार्ग में 12 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की भी घोषणा की। साथ ही फरसाबहार और भेलवा में नए महतारी सदनों के निर्माण की बात कही गई। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिलाओं से संवाद करते हुए महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को सरकार की प्राथमिकता बताया। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के विकास कार्यों और महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं पर भी चर्चा की गई।


क्या नेपाल में 'Made in China' है फ्लैश फ्लड? आरोपों के बीच बीजिंग ने दिया जवाब

by पूजा झा

काठमांडू/बीजिंग: नेपाल में तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद चीन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नेपाल के कुछ पत्रकारों के एक समूह ने आरोप लगाया है कि चीन ने संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर नेपाल को समय रहते पर्याप्त जानकारी नहीं दी। इन आरोपों के बीच नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने आपदा पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन की ओर से किए जा रहे राहत प्रयासों और सहायता की जानकारी दी है। चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ग्यिरोंग-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस हादसे से चीन और नेपाल, दोनों देशों के सीमा क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान हुआ है। राजदूत ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में चीन नेपाल के साथ खड़ा है। उन्होंने बताया कि चीन की ओर से भी इस आपदा में नुकसान हुआ है, लेकिन इसके बावजूद बीजिंग ने नेपाल के लिए आपातकालीन राहत सामग्री और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की है।

चीन ने कहा- हर संभव मदद जारी रहेगी

झांग माओमिंग ने कहा कि चीन आगे भी नेपाल को हरसंभव सहायता देने का प्रयास करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश मिलकर इस मुश्किल दौर से बाहर निकलेंगे और प्रभावित क्षेत्रों में जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सहयोग करेंगे। हालांकि, चीनी राजदूत ने नेपाल के पत्रकारों की ओर से लगाए गए उस आरोप पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसमें कहा गया था कि चीन ने बाढ़ के संभावित खतरे की जानकारी नेपाल के साथ समय रहते साझा नहीं की। उनका बयान मुख्य रूप से राहत सामग्री, आर्थिक सहायता और आपदा के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग पर केंद्रित रहा।

सीमा क्षेत्र होने के कारण बढ़ी कूटनीतिक बहस

ग्यिरोंग-रसुवागढ़ी क्षेत्र चीन और नेपाल के बीच एक महत्वपूर्ण सीमा इलाका है। ऐसे में फ्लैश फ्लड के बाद सूचना साझा करने, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने इस प्राकृतिक आपदा को कूटनीतिक बहस से भी जोड़ दिया है। फिलहाल दोनों देशों के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटा हुआ है।

नेपाल में 157 मौतों का दावा, चीन में भी सैकड़ों लापता

इस भीषण फ्लैश फ्लड से नेपाल और चीन के हिमालयी सीमा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में अब तक 157 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं चीन की ओर से भी हालात गंभीर बताए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है। अलग-अलग रिपोर्टों में चीन में 265 लोगों के लापता होने का दावा किया गया है। हालांकि, मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं। दोनों देशों की एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी और राहत अभियान चला रही हैं। फ्लैश फ्लड की वजह को लेकर उठे सवालों और चीन पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और भविष्य में ऐसी आपदाओं के लिए बेहतर शुरुआती चेतावनी तथा सूचना साझाकरण व्यवस्था तैयार करना है।


नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़: 16 की मौत, 105 भारतीय समेत 400 यात्री लापता, यूपी-बिहार में अलर्ट

by पूजा झा

नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस आपदा में अब तक 16 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल से भारत आने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।

पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर बाढ़ से हुई जनहानि पर गहरा दुख जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता और राहत उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत प्रभावित लोगों के लिए जल्द राहत सामग्री भेजने की तैयारी कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार लगातार काठमांडू के संपर्क में है और हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। जरूरत और परिस्थितियों के आधार पर मानवीय सहायता पैकेज जल्द नेपाल भेजा जा सकता है।

यूपी में योगी सरकार ने बढ़ाई सतर्कता

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही को चिंताजनक बताया है। उन्होंने महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत और बचाव से जुड़ी सभी जरूरी तैयारियां पहले से पूरी रखने को कहा है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

बिहार में NDRF की टीमें तैनात

वहीं, बिहार में भी नेपाल की बाढ़ के संभावित असर को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है। राज्य के संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। कोसी और गंडक नदी बेसिन में जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए NDRF की कई टीमों को बिहार के छह जिलों के लिए रवाना किया गया है।

टिमुरे बाजार और सीमा क्षेत्र में भारी नुकसान

जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का स्तर बढ़ गया, जिससे रसुवा क्षेत्र के टिमुरे बाजार और रसुवा सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ। तेज बहाव में कई वाहन बह गए और कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, करीब 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की मदद से बचाव अभियान जारी है।

105 भारतीयों समेत 400 यात्रियों के लापता होने की सूचना

पर्यटन और ट्रैवल कंपनियों से मिले शुरुआती रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से करीब 400 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की ट्रैवल एजेंसियों, स्थानीय गाइडों, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से जांच की जा रही है। लापता बताए गए विदेशी पर्यटकों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं। नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि भारत लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों में प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।


कैंसर के एक लाख वाले इंजेक्शन में निकला सिर्फ पानी...कालाबाजारी के खेल पर खौफनाक खुलासा

by पूजा झा

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर की महंगी दवाओं की कथित कालाबाजारी और नकली दवा सप्लाई से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि जिन एंटी-कैंसर इंजेक्शन को मरीज और उनके परिवार ब्लैक मार्केट से करीब एक लाख रुपये तक में खरीद रहे थे, उनमें कैंसर से लड़ने वाला जरूरी तत्व तक मौजूद नहीं था। जांच में एक इंजेक्शन में कथित तौर पर सिर्फ पानी पाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, मामले में कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह नेटवर्क दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों तक फैला हुआ बताया जा रहा है। आरोप है कि इस रैकेट के जरिए नकली दवाओं के साथ-साथ अस्पतालों और सरकारी सप्लाई से जुड़ी कैंसर की महंगी दवाओं की भी अवैध तरीके से बिक्री की जा रही थी।

जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान एवालुमैब इंजेक्शन को लेकर गंभीर खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, इस इंजेक्शन की जांच दवा निर्माता कंपनी के माध्यम से जर्मनी स्थित मर्क लैब में कराई गई। जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर पाया गया कि इंजेक्शन में कैंसर से लड़ने वाला मूल सक्रिय तत्व मौजूद नहीं था। यानी जिस दवा को मरीज इलाज की उम्मीद में भारी कीमत चुकाकर खरीद रहे थे, उसमें जरूरी दवा की मात्रा शून्य बताई गई। इस खुलासे ने कैंसर मरीजों की सुरक्षा और दवा सप्लाई सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

7 राज्यों तक फैला था कथित नेटवर्क

दिल्ली पुलिस ने 20 अगस्त को इस कथित रैकेट का खुलासा किया। पुलिस के मुताबिक, पूरे नेटवर्क का कारोबार करीब 9 करोड़ रुपये तक का हो सकता है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, 6 खाली वायल, 7 खाली दवा के बॉक्स और दूसरी दवाओं की 3,021 यूनिट बरामद की हैं। इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। बरामद दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर दवाएं शामिल बताई गई हैं। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क का फैलाव दिल्ली-NCR के अलावा मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कई अन्य इलाकों तक था।

गुप्त सूचना से शुरू हुई जांच

पुलिस को 22 जून को इस पूरे मामले की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने संदिग्धों और संभावित ठिकानों की निगरानी शुरू की। जांच के दौरान पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में कई संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई। 11 जुलाई को ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के सहयोग से सात टीमों ने दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी की। तलाशी और पूछताछ के बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और पुलिस ने अलग-अलग जगहों से 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

सिंडिकेट तक कैसे पहुंचती थीं दवाएं?

पुलिस जांच में दवाओं के सिंडिकेट तक पहुंचने के तीन कथित रास्ते सामने आए हैं। पहला रास्ता गैरकानूनी स्रोतों से नकली दवाओं की खरीद का बताया गया है। दूसरा, अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए रखी गई दवाओं में कथित हेराफेरी का शक है। तीसरे रास्ते के तौर पर सरकारी संस्थानों और गोदामों से सरकारी सप्लाई की दवाओं को अवैध तरीके से बाहर निकालने की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, इन दवाओं को बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और जरूरी दस्तावेजों के अलग-अलग घरों और ठिकानों पर रखा जाता था। इसके बाद बिचौलियों और कथित सप्लाई नेटवर्क के जरिए इन्हें जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया जाता था।

असली बॉक्स में नकली दवा का खेल

पुलिस के मुताबिक, आरोपी असली दवाओं के कार्टन और खाली बॉक्स संभालकर रखते थे। इसके बाद बैच नंबर, एमआरपी और दूसरी पहचान संबंधी जानकारी को एसीटोन जैसे केमिकल की मदद से मिटाने का आरोप है। फिर थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथीन जैसी सामग्री का इस्तेमाल कर दवाओं को दोबारा पैक किया जाता था। पुलिस को छापेमारी के दौरान दवाओं और नकदी के लेनदेन से जुड़े रजिस्टर और डायरी भी मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

कई शहरों से आरोपी पकड़े गए

गिरफ्तार आरोपियों में लक्ष्मी नगर निवासी अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी के नाम भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, अभिषेक वर्ष 2022 से दवाओं की खरीद और सप्लाई के काम से जुड़ा था। उसके पास से करीब 4 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। वहीं, पुलिस ने शुभम कुमार चौधरी के पास से करीब 23 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है। नेटवर्क से जुड़े लोगों की मौजूदगी नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, झज्जर, फरीदाबाद, मुंबई और हैदराबाद समेत कई शहरों में बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, नोएडा के आनंद कुमार के पास से 337 एंटी-कैंसर वायल बरामद हुए। फरीदाबाद के दीपक उर्फ रवि के पास से 108 वायल और करीब 6.5 लाख रुपये, जबकि गुरुग्राम के मयंक गर्ग के पास से 55 वायल मिलने की बात कही गई है।

IndiaMART समेत ऑनलाइन नेटवर्क की भी जांच

मामले में 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज की गई थी। अब पुलिस पूरे सप्लाई नेटवर्क और पैसों के लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। डॉ. मनीष शर्मा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नकली और मिलावटी कैंसर दवाओं का असली स्रोत क्या था और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे। जांच में IndiaMART जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में दवाओं की सप्लाई के संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों तक कथित नकली या सरकारी सप्लाई से बाहर निकाली गई दवाएं आखिर कब से पहुंच रही थीं। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित रैकेट के पीछे और कौन लोग शामिल हैं और करोड़ों रुपये के इस कारोबार की जड़ें देश के किन-किन हिस्सों तक फैली हुई हैं।


स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज की

by पूजा झा

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली एक छात्रा की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए अपना ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता हिजाब पहनने को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए पर्याप्त धार्मिक या कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी। मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा है, जहां 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने की।

कोर्ट ने ड्रेस कोड को बताया संस्थान का अधिकार

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी स्कूल की यूनिफॉर्म नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है और उसमें किसी विशेष समुदाय या छात्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाता, तो संस्थान को अपना ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार है। अदालत ने माना कि स्कूलों में यूनिफॉर्म का उद्देश्य केवल पहनावे को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि अनुशासन, समानता और संस्थान की एकरूप पहचान को बनाए रखना भी है। ऐसे में व्यक्तिगत पसंद के आधार पर निर्धारित नियमों में बदलाव की मांग को स्वतः कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता।

'हिजाब अनिवार्य प्रथा होने का पर्याप्त आधार नहीं'

पीठ ने कहा कि छात्रा की ओर से ऐसा कोई ठोस धार्मिक या कानूनी साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी धार्मिक आस्था का दावा कर देने भर से संविधान के तहत विशेष छूट का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका प्रयोग कानून और सार्वजनिक व्यवस्था के दायरे में ही किया जाता है। शैक्षणिक संस्थानों के समान और गैर-भेदभावपूर्ण नियमों को चुनौती देने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार होना जरूरी है। छात्रा ने अदालत में यह तर्क दिया था कि वह कक्षा 6 से लेकर कक्षा 10 तक हिजाब पहनकर स्कूल आती रही थी और उस दौरान स्कूल प्रशासन ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी संस्थान की ओर से पहले दी गई ढील या अनुमति भविष्य में उसी व्यवस्था को स्थायी कानूनी अधिकार नहीं बना देती। यदि स्कूल बाद में अपने निर्धारित ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करता है, तो केवल पुरानी सहमति के आधार पर नियमों में बदलाव की मांग नहीं की जा सकती।

कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पहले के न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया। पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्णय का संदर्भ दिया, जिसमें हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा मानने के मुद्दे पर विस्तार से विचार किया गया था। अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में पहले के न्यायिक दृष्टिकोण से अलग निष्कर्ष निकालने का पर्याप्त आधार सामने नहीं आया है। इन सभी तथ्यों और कानूनी तर्कों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

स्कूल प्रबंधन को यूनिफॉर्म नियम लागू करने की छूट

फैसले के बाद टैगोर पब्लिक स्कूल प्रबंधन को अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म नीति लागू करने का अधिकार बरकरार रहेगा। अदालत ने साफ किया कि जब तक ड्रेस कोड सभी छात्रों के लिए समान और गैर-भेदभावपूर्ण है, तब तक संस्थान अनुशासन और एकरूपता के लिए ऐसे नियम बना और लागू कर सकता है। यह फैसला एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन के सवाल को चर्चा में ले आया है।


दिल्ली-NCR में मूसलाधार बारिश से हालात बिगड़े, कई इलाकों में जलभराव; सड़कों पर रेंगती रहीं गाड़ियां

by पूजा झा

दिल्ली-NCR में सोमवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी और आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश के बाद जहां लोगों को उमस से राहत मिली, वहीं कई जगह जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम ने मुश्किलें बढ़ा दीं। तेज बारिश के कारण दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई और लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, अगले कुछ घंटों के दौरान दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज और बदल सकता है। गाजियाबाद, पूर्वी दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, दक्षिणी दिल्ली और राजधानी के कुछ अन्य इलाकों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ बिजली चमकने और गरज के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। हवाओं की रफ्तार करीब 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

हर इलाके में एक जैसा नहीं रहेगा मौसम

दिल्ली-NCR में बारिश की स्थिति सभी जगह एक जैसी नहीं रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में तेज और लगातार बारिश हो सकती है, जबकि आसपास के इलाकों में हल्की बारिश या केवल बादल छाए रहने की स्थिति बन सकती है। मौसम में इस तरह के स्थानीय बदलाव के कारण लोगों को यात्रा से पहले मौसम की जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। तेज बारिश के दौरान सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो सकती है। कई निचले इलाकों और सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने की आशंका है। खासतौर पर ऑफिस जाने वाले लोगों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की जरूरत पड़ सकती है।

एमबी रोड पर भीषण जाम, एक घंटे से फंसे रहे लोग

बारिश और जलभराव के बीच दिल्ली के एमबी रोड पर भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिला। संगम विहार के आसपास वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई लोग करीब एक घंटे तक जाम में फंसे रहे। सड़क पर वाहनों की धीमी रफ्तार के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। जाम का असर खासतौर पर उन यात्रियों पर पड़ा जिन्हें ऑफिस, दिल्ली एयरपोर्ट और साकेत कोर्ट सहित अन्य जरूरी स्थानों पर पहुंचना था। कई लोगों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई। सुबह और दोपहर के व्यस्त समय में ट्रैफिक की स्थिति और खराब हो गई। बारिश के दौरान दिल्ली की सड़कों पर अक्सर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या सामने आती है। सोमवार को भी कुछ इलाकों में यही स्थिति देखने को मिली, जहां गाड़ियां बेहद धीमी गति से आगे बढ़ती नजर आईं।

बारिश के साथ तेज हवाओं की भी संभावना

मौसम के बदले मिजाज के बीच बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। हवा की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज हवाओं और बिजली चमकने के दौरान लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। कमजोर होर्डिंग, बिजली के खंभों और निर्माणाधीन इमारतों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तेज बारिश और फिसलन वाली सड़कें परेशानी बढ़ा सकती हैं। ऐसे में बाइक और स्कूटर चालकों को वाहन की रफ्तार नियंत्रित रखने की जरूरत है।

अगले कुछ घंटे रहेंगे अहम

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-NCR में अगले कुछ घंटों तक मौसम की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। बारिश की तीव्रता अलग-अलग इलाकों में बदल सकती है और कुछ स्थानों पर अचानक तेज बारिश शुरू हो सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि यदि बहुत जरूरी काम न हो तो तेज बारिश और बिजली चमकने के दौरान बाहर निकलने से बचें। यात्रा करना जरूरी हो तो जलभराव वाले रास्तों से सावधानी से गुजरें और ट्रैफिक की स्थिति देखकर अतिरिक्त समय लेकर निकलें। बारिश ने एक तरफ दिल्ली-NCR के लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी है, लेकिन दूसरी तरफ जलभराव और ट्रैफिक जाम ने दैनिक जीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। आने वाले घंटों में मौसम कैसा रहता है और बारिश का असर किन इलाकों में ज्यादा पड़ता है, इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।


एक साल में 3 फ्री LPG सिलेंडर, ट्रांसजेंडर के लिए मुफ्त में बस सफर... CM विजय का बड़ा ऐलान

by पूजा झा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं. सरकार ने गरीब परिवारों को साल में तीन मुफ्त LPG सिलेंडर देने की योजना का ऐलान किया है. 'अन्नपूर्णानी सुपर सिक्स' नाम की यह योजना पोंगल 2027 से शुरू होगी. इसके तहत सालाना 2.5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों को हर साल तीन सिलेंडर मुफ्त दिए जाएंगे... सरकार के मुताबिक, इस योजना से करीब 1.30 करोड़ परिवारों को फायदा मिलेगा. इसके लिए राज्य के खजाने से हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. मुख्यमंत्री विजय ने बताया कि लाभार्थियों को सिलेंडर खरीदने के बाद उसकी कीमत सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा की जाएगी. हर साल तीन सिलेंडर मुफ्त में मिलेगा.

महिलाओं को फ्री बस सेवा भी मिलेगी

विजय ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ सामान्य बसों में ही नहीं, बल्कि एक्सप्रेस, LSS और डीलक्स बसों में भी मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी. इसके अलावा अंतर-जिला बसों में भी महिलाओं को 'वेट्री पयाना थिट्टम' के तहत मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. इस योजना को 2 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा.मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि ट्रांसजेंडर यात्रियों को भी मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. सरकार के इन फैसलों को राज्य में महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.

चेन्नई के परंदूर में बनेगा नया एयरपोर्ट

चेन्नई के परंदूर में प्रस्तावित नए एयरपोर्ट को लेकर भी विजय ने सरकार का रुख साफ कर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे स्थान की तलाश कर रही है, जहां एयरपोर्ट बनने से परिवार प्रभावित न हों. उन्होंने कहा कि परंदूर एयरपोर्ट का स्थानीय लोगों ने विरोध किया था और वह प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं.विजय ने कहा कि सरकार ने नए एयरपोर्ट के लिए कुछ वैकल्पिक जगहों की पहचान की है. उन्होंने दोहराया कि परंदूर में एयरपोर्ट बनाने के पक्ष में सरकार नहीं है. साथ ही चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल-5 बनाने का भी ऐलान किया गया...मुख्यमंत्री विजय ने किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और विकास के नाम पर उनके हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में एक तरफ गरीब परिवारों के लिए मुफ्त सिलेंडर और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का ऐलान हुआ है, वहीं परंदूर एयरपोर्ट को लेकर सरकार ने स्थानीय लोगों के पक्ष में अपना रुख दोहराया है.


जयपुर में स्कूल निरीक्षण को लेकर बवाल, CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट और गाड़ियों में तोड़फोड़ का आरोप

by पूजा झा

राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर शुक्रवार को विवाद खड़ा हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत कार्यकर्ता राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति देखने पहुंचे थे। ग्रामीणों के विरोध के बाद मामला बढ़ गया और कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि ग्रामीणों ने उसके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, उन्हें गांव से खदेड़ दिया और उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ भी धक्का-मुक्की होने का दावा किया गया है। हालांकि, घटना को लेकर ग्रामीणों का पक्ष अलग है। उनका आरोप है कि CJP के कार्यकर्ता स्कूल के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने के लिए गांव पहुंचे थे।

स्कूल पहुंची CJP टीम का ग्रामीणों ने किया विरोध

बताया जा रहा है कि सुबह CJP की टीम रामपुरा-कंवरपुरा स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी। टीम के पहुंचने पर कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और कार्यकर्ताओं को वहां से जाने के लिए कहा। कुछ समय बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका भी मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। CJP का आरोप है कि इसके बाद कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और शीशे तोड़े गए। पार्टी की ओर से यह भी दावा किया गया कि कार्यकर्ताओं पर रेत और पत्थर फेंके गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

आशुतोष रांका ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप

घटना के बाद आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि स्कूल में मौजूद लोग सामान्य ग्रामीण नहीं, बल्कि बीजेपी के बुलाए हुए लोग थे। उन्होंने एक व्यक्ति का नाम कमल प्रधान बताते हुए गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि उनकी टीम के जो सदस्य पहले से गांव में मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। रांका ने आरोप लगाया कि बीजेपी को सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाए जाना पसंद नहीं है। उनका कहना था कि अगर बच्चों के लिए स्कूलों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए। CJP ने पिछले दिनों राजस्थान में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि अभियान के तहत राज्य के अलग-अलग जिलों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लिया जाएगा और जर्जर भवनों तथा मूलभूत सुविधाओं की कमी को सामने लाया जाएगा।

अभिजीत दिपके ने भी दी प्रतिक्रिया

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि राजस्थान में आशुतोष रांका पर हमला किया गया और पुलिस ने ऐसा होने दिया। हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने क्या कहा?

ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए स्कूल की समस्या को लेकर अपना पक्ष रखा। ग्रामीण विष्णु कुमार शर्मा के मुताबिक, गांव में प्राथमिक विद्यालय पहले पांचवीं कक्षा तक संचालित होता था और स्कूल भवन के लिए उनके परिवार की ओर से जमीन दी गई थी। उन्होंने बताया कि स्कूल भवन का निर्माण वर्ष 1999 में हुआ था, लेकिन लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं हुई। भवन की हालत खराब होने के कारण बच्चों को फिलहाल गांव के एक बड़े भवन में उपलब्ध कराए गए दो कमरों में पढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार, करीब 20 से 30 बच्चे वहां पढ़ते हैं और दो शिक्षक कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। विष्णु कुमार शर्मा ने दावा किया कि बगरू विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. कैलाश वर्मा की ओर से स्कूल के लिए करीब 9 लाख रुपये के बजट का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग स्कूल की इमारत का जल्द निर्माण और बच्चों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

CJP पर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप

ग्रामीण राजेश कुमार शर्मा ने CJP कार्यकर्ताओं के गांव में पहुंचने का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल की समस्या को लेकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी गांव में पहुंचकर माहौल बिगाड़ना उचित नहीं है। राजेश कुमार शर्मा ने CJP पर राजनीतिक फायदे के लिए मुद्दे को उठाने का आरोप लगाया। हालांकि, संगठन पर विदेशी फंडिंग से जुड़े उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। राजेश कुमार शर्मा के मुताबिक, स्कूल की इमारत की समस्या पुरानी है और ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार जल्द निर्माण कार्य शुरू कराए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार काम नहीं करती है तो ग्रामीण आपसी सहयोग से स्कूल के निर्माण की कोशिश करेंगे।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर पहले से विवाद

CJP ने 15 अगस्त से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने का ऐलान किया था। संगठन ने राजस्थान के जयपुर समेत कई जिलों में सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने की बात कही है। इसी बीच राजस्थान शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यार्थियों की फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए। आदेश के मुताबिक, प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख की पूर्व अनुमति के बिना बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। विद्यार्थियों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू या लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी अनुमति जरूरी होगी। विभाग ने इसके पीछे विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरिमा और निजता को वजह बताया है। CJP ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा है कि स्कूलों की स्थिति का निरीक्षण करने का अभियान जारी रहेगा। रामपुरा-कंवरपुरा की घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और राजनीतिक संगठनों के स्कूल निरीक्षण के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं और घटना की पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


‘टैक्स सेना के जवान भी देते हैं’, लद्दाख में जवानों से बहस का वीडियो वायरल, Gen-Z महिला पर भड़का सोशल मीडिया

by पूजा झा

लद्दाख के करगिल जिले में सुरक्षा बलों और एक महिला पर्यटक के बीच बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना मिनीमार्ग चेकपॉइंट की बताई जा रही है, जहां सुरक्षा कारणों से सड़क को कुछ समय के लिए बंद किया गया था। इसी दौरान महिला की वहां तैनात जवानों से बहस हो गई। वायरल वीडियो में महिला सुरक्षा बलों पर नाराजगी जताते हुए उंगली दिखाकर बहस करती नजर आ रही है। वह खुद को Gen-Z बताते हुए कहती है कि वह ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगी। महिला ने कथित तौर पर यह भी कहा कि सेना के जवानों को मिलने वाली सैलरी आम लोगों के टैक्स से आती है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर महिला के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने जवाब देते हुए कहा कि सेना के जवान भी टैक्स देते हैं और देश की सुरक्षा के लिए तैनात सैनिकों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

सैन्य गतिविधियों के चलते बंद था रास्ता

बताया जा रहा है कि मिनीमार्ग चेकपॉइंट पर सड़क को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया था। खराब मौसम और सैन्य गतिविधियों के चलते संवेदनशील इलाके में कुछ समय के लिए यातायात रोका गया था। वीडियो में मौजूद जवान महिला को समझाने और स्थिति को शांत रखने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। उन्होंने महिला के आक्रामक व्यवहार का उसी अंदाज में जवाब नहीं दिया।

‘टैक्स देने से सुरक्षा नियम तोड़ने का अधिकार नहीं’

घटना पर पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सेना की सैलरी टैक्स से आती है कहना सैनिकों के योगदान और बलिदान को कम करके आंकने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि सेना के जवान खुद भी टैक्स का भुगतान करते हैं और लद्दाख एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है। लेफ्टिनेंट कर्नल एन. थियागराजन ने भी सुरक्षा अभियानों के दौरान सड़क बंद किए जाने को वैध प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि टैक्स देने से किसी व्यक्ति को सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने का अधिकार नहीं मिल जाता।

सोशल मीडिया पर महिला की आलोचना

वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने महिला के व्यवहार की आलोचना की। लोगों का कहना है कि लद्दाख जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा बलों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और निर्देशों का पालन करना जरूरी है। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि Gen-Z होना अपनी बात रखने का अधिकार जरूर देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाए या ड्यूटी पर तैनात जवानों से बदसलूकी की जाए।

उमर अब्दुल्ला ने भी दी प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महिला के कथित व्यवहार को ‘जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है’ वाली मानसिकता का नया रूप बताया। फिलहाल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। विवाद के केंद्र में एक तरफ नागरिकों के अधिकार और दूसरी तरफ संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने का सवाल है।


‘जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा’, उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। श्रीनगर पहुंचने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। बैठक के बाद गोर ने जम्मू-कश्मीर को “भारत का एक अहम हिस्सा” बताया। उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। गोर ने श्रीनगर में मीडिया से कहा कि यहां आना उनके लिए सुखद अनुभव है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को खूबसूरत जगह बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ उनकी मुलाकात काफी अच्छी और गर्मजोशी भरी रही। उन्होंने बताया कि बैठक के बाद कुछ मुद्दों को आगे दिल्ली और वॉशिंगटन में भी उठाया जाएगा।

उमर अब्दुल्ला से किन मुद्दों पर हुई बात?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने खास तौर पर पर्यटन, बागवानी और नई अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ पुराने और लंबित मुद्दे हैं, जिन्हें समय के साथ हल किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच संपर्क और सहयोग आने वाले समय में और बढ़ेगा।

अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी पर भी बड़ा संकेत

सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के लिए अमेरिका की मौजूदा ट्रैवल एडवाइजरी की भी समीक्षा के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका समय-समय पर अपने यात्रा संबंधी दिशा-निर्देशों की समीक्षा करता है और जम्मू-कश्मीर को लेकर भी इसे देखा जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल कोई बड़ा ऐलान नहीं किया जा रहा है।अमेरिकी विदेश विभाग की मौजूदा एडवाइजरी में जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्से के लिए यात्रा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी है। गोर ने संकेत दिया कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए इसे भविष्य में डाउनग्रेड करने पर विचार किया जा सकता है।

पहली बार कश्मीर पहुंचे सर्जियो गोर

सर्जियो गोर का यह जम्मू-कश्मीर का पहला दौरा है। वह दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे हैं और कश्मीर के बाद लद्दाख जाने का भी कार्यक्रम है। उनके दौरे को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गोर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में भारत में राजदूत हैं और दक्षिण एवं मध्य एशिया से जुड़े मामलों में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में श्रीनगर का उनका दौरा और जम्मू-कश्मीर को लेकर दिया गया बयान कूटनीतिक नजरिए से भी काफी अहम है।

उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?

उमर अब्दुल्ला ने बैठक को लेकर कहा कि उन्होंने अमेरिकी राजदूत से भारत-अमेरिका संबंधों और जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में अमेरिका की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें केंद्र सरकार के साथ बातचीत को प्राथमिकता देनी होगी। यानी मुलाकात में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर किसी बाहरी मध्यस्थता की मांग सामने नहीं आई, बल्कि बातचीत का फोकस सहयोग, विकास और भारत-अमेरिका संबंधों पर रहा।

क्यों महत्वपूर्ण है गोर का बयान?

जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका की आधिकारिक स्थिति में लंबे समय से भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर रहा है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर को सीधे “भारत का अहम हिस्सा” कहना और साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी यात्रा चेतावनी की समीक्षा के संकेत देना नई चर्चा को जन्म देता है। अब सर्जियो गोर के इस दौरे के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि क्या अमेरिका जम्मू-कश्मीर को लेकर अपनी ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव करता है और क्या भारत-अमेरिका के बीच जम्मू-कश्मीर से जुड़े आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का दायरा आगे बढ़ता है।


KPSC भर्ती घोटाला: 21 ठिकानों पर ED की छापेमारी, जानें क्या है पूरा मामला

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच के तहत कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। जांच के दायरे में KPSC का कार्यालय, आयोग के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, KPSC सदस्य शांता होसमनी और कथित बिचौलियों से जुड़े ठिकाने शामिल हैं। ED की टीमें परीक्षा की डिजिटल कॉपियों की जांच से जुड़ी कंपनी एडुस्टेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय और वेटरिनरी ऑफिसर पद के लिए चयनित कुछ उम्मीदवारों से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ले रही हैं। जांच कर्नाटक के कई शहरों के अलावा अहमदाबाद में भी की जा रही है।

PMLA के तहत ED की कार्रवाई

बताया जा रहा है कि ED ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत शुरू की है। जांच में कथित बिचौलियों के तौर पर सामने आए अली और सिकंदर से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली जा रही है। यह कार्रवाई KPSC के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार की ओर से जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किए जाने के बाद सामने आई है।

क्या है KPSC भर्ती विवाद?

पूरा मामला KPSC की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। आयोग ने कुल 400 पदों पर भर्ती शुरू की थी। इनमें 342 नियमित और 58 बैकलॉग पद शामिल थे। इस भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप लगाए हैं। उम्मीदवारों का दावा है कि कुछ कथित बिचौलियों ने अंतिम चयन सूची में नाम शामिल कराने के बदले बड़ी रकम की मांग की। आरोपों के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों से कथित तौर पर 80 लाख रुपये तक की मांग की गई और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि रकम देने के बाद चयन सुनिश्चित कराया जा सकता है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि एजेंटों के जरिए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ। ED की मौजूदा कार्रवाई के बाद KPSC भर्ती मामले की जांच और तेज होने की संभावना है। हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री बरामद हुई, इसकी विस्तृत जानकारी जांच एजेंसी की ओर से सामने आना बाकी है।


उज्जैन महाकाल मंदिर में भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ जैसे हालात, कई श्रद्धालु गिरे

सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के मौके पर उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। इसी दौरान हरसिद्धि मंदिर के सामने बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र में अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया, जिससे कुछ समय के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कुछ श्रद्धालु गिर गए और कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। करीब 13 श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और परिजनों ने लोगों को भीड़ से बाहर निकाला, जिसके बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

करंट फैलने की अफवाह से मची अफरातफरी

जानकारी के मुताबिक, नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी कतार के पास अचानक करंट फैलने की अफवाह फैल गई। बताया गया कि हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास डीपी के आसपास करंट फैलने की बात कही गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। अफवाह के बीच भीड़ का दबाव बढ़ा और कुछ लोग गिर गए। कुछ श्रद्धालुओं के बैरिकेडिंग से टकराने की भी जानकारी सामने आई। वहीं, नीलकंठ द्वार के पास कुछ लोगों के बैरिकेडिंग पार करने की तस्वीरें भी सामने आईं।

मंदिर समिति ने भगदड़ की खबरों को बताया भ्रामक

हालांकि, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने मंदिर परिसर में भगदड़ और अव्यवस्था से जुड़ी कुछ खबरों का खंडन किया है। समिति ने कहा कि नागपंचमी, सावन सोमवार और भगवान महाकाल की सवारी एक ही दिन होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही, लेकिन दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए थे। समिति के मुताबिक, अलग-अलग मार्गों पर लंबी कतारें होने के बावजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से दर्शन कराने की व्यवस्था की गई। समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी घटना को लेकर केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

6 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा

सावन के तीसरे सोमवार और नागचंद्रेश्वर मंदिर के विशेष दर्शन के चलते उज्जैन में सुबह से ही भारी भीड़ बनी हुई थी। मंदिर समिति के अनुसार, अब तक करीब 6.19 लाख श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन खोले जाते हैं। इसी वजह से इस दिन मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। फिलहाल, भीड़ के दबाव और अफवाह के कारण कुछ श्रद्धालुओं के गिरने की घटना सामने आई है, जबकि मंदिर समिति ने इसे व्यापक भगदड़ बताने वाली खबरों को भ्रामक बताया है। अधिकारियों की ओर से घटना और घायलों की संख्या को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।


दिल्ली में 6 जगहों पर बम की धमकी, हाई कोर्ट से IGI एयरपोर्ट तक मचा हड़कंप

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले दिल्ली में कई महत्वपूर्ण स्थानों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। दिल्ली हाई कोर्ट, IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 समेत राजधानी की छह जगहों को धमकी दी गई है। धमकी ई-मेल और अन्य माध्यमों से मिलने की जानकारी सामने आई है। धमकी मिलने के तुरंत बाद संबंधित परिसरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई और बम निरोधक दस्तों तथा खोजी कुत्तों की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया। दिल्ली फायर सर्विस की टीमें भी कई स्थानों पर भेजी गईं। शुरुआती जांच में अभी तक किसी भी जगह से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं होने की जानकारी है।

इन 6 जगहों को मिली धमकी

जिन स्थानों को निशाना बनाने की धमकी मिली, उनमें दिल्ली हाई कोर्ट, जामनगर हाउस, झंडेवालान स्थित फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स, साकेत स्थित कार्यालय/डीएम कार्यालय, IGI एयरपोर्ट का टर्मिनल-3 और दिल्ली कैंट का SDM कार्यालय शामिल हैं। दिल्ली हाई कोर्ट को मिले ई-मेल के बाद कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। परिसर में सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जांच की गई। दिल्ली हाई कोर्ट के एक अधिकारी ने धमकी को प्रथम दृष्टया फर्जी बताया और कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

15 अगस्त से पहले बढ़ी सुरक्षा

यह धमकी ऐसे समय सामने आई है जब राजधानी में 15 अगस्त को लेकर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां चल रही हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को वहां से देश को संबोधित करेंगे। ऐसे में संवेदनशील सरकारी इमारतों, सार्वजनिक स्थानों और परिवहन केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। प्रवेश और निकास मार्गों पर जांच बढ़ाई गई है। सुरक्षा एजेंसियां धमकी भेजने वाले ई-मेल के स्रोत और उसकी विश्वसनीयता की जांच में जुटी हैं। 
फिलहाल जांच में किसी विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां एहतियात के तौर पर सभी संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही हैं


‘यह मेरा और छात्रों का संवाद, BCI क्यों टांग अड़ा रहा?’ NALSAR विवाद पर CJI सख्त, मनन मिश्रा को नोटिस

हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के रुख पर सख्त सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में BCI को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति जाहिर करने के लिए दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। मामला उस समय विवादों में आया जब NALSAR के कुछ छात्रों ने CJI सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर निमंत्रण पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।

CJI ने BCI के हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने छात्रों और उनके बीच हुए संवाद का जिक्र करते हुए BCI के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों ने उन्हें पत्र लिखा था और यह उनके तथा छात्रों के बीच का संवाद था। ऐसे में BCI का इसमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। CJI ने यह भी कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और असहमति दर्ज कराने का अधिकार है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी छात्र गतिविधियों और आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं।

BCI ने पहले क्या किया था?

विवाद के बीच BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट को रोकने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले पर कानूनी समुदाय और अन्य पक्षों की ओर से सवाल उठे। हालांकि, बढ़ते विवाद के बाद BCI ने अपना यह निर्देश वापस ले लिया। BCI की ओर से कहा गया कि किसी भी छात्र को ऐसी परिस्थितियों के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए, जिनमें उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

विवाद की पृष्ठभूमि

20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़े छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान CJI की कुछ मौखिक टिप्पणियों को लेकर NALSAR के छात्रों के बीच असहमति सामने आई थी। इसके बाद छात्रों के एक समूह ने CJI को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई। इस घटनाक्रम ने छात्र असहमति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पेशेवर नियामक संस्थाओं की शक्तियों को लेकर बहस छेड़ दी है। NALSAR के छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक का आदेश वापस लिया जा चुका है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में BCI की भूमिका और उसके फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

CJP ने भी उठाए थे सवाल

इस मामले को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’  के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी BCI के फैसले की आलोचना की थी। CJP ने छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले ऐसे कदम पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्र अधिकारों से जोड़कर देखा था। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान CJI के सख्त रुख के बाद विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। मामले में आगे की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि BCI के फैसले और उसकी प्रक्रिया पर अदालत का अंतिम रुख क्या रहता है। 


हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ पर सियासत, कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में हुई ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। खड़गे के लौटने के बाद रामलीला मैदान में कराए गए कथित ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। रैली के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराया गया। संगठन के सदस्यों ने खड़गे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए कहा कि जिस मैदान में रामलीला का मंचन होता है, वहां उनकी रैली के बाद शुद्धिकरण जरूरी था। संगठन ने इसके लिए खड़गे के पुराने कथित सनातन विरोधी बयानों को आधार बताया।

कांग्रेस ने बताया दलित विरोधी मानसिकता

शुद्धिकरण यज्ञ के बाद कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए इसे दलित विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी से जुड़े लोगों ने ही यह आयोजन कराया। पार्टी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस की रैली के बाद ही रामलीला मैदान के ‘शुद्धिकरण’ की जरूरत क्यों पड़ी? कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 8 अगस्त की रैली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मंच पर मौजूद थे। कांग्रेस ने दावा किया कि इन नेताओं की सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए मैदान का शुद्धिकरण कराया जाना सामाजिक भेदभाव और दलित-पिछड़ा विरोधी सोच को दर्शाता है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने बुधवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में धरना दिया। कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी से इस मामले पर जवाब मांगा और शुद्धिकरण यज्ञ को सामाजिक भेदभाव की मानसिकता का प्रतीक बताया।

‘खड़गे के पुराने बयानों के चलते कराया यज्ञ’

वहीं, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। संगठन का कहना है कि यज्ञ का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अपमान करना नहीं था। संगठन के मुताबिक, खड़गे के पुराने बयानों को सनातन विरोधी मानते हुए धार्मिक आस्था के आधार पर यह आयोजन किया गया। संगठन ने कहा कि रामलीला जैसे धार्मिक आयोजन से जुड़े मैदान में कथित तौर पर सनातन विरोधी विचार रखने वाले व्यक्ति की रैली के बाद शुद्धिकरण करना उनकी धार्मिक आस्था का विषय है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने की जांच की मांग

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन वाले मंच का बीजेपी से जुड़े लोगों द्वारा ‘शुद्धिकरण’ किया जाना निंदनीय है। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव और संकीर्ण मानसिकता की पराकाष्ठा बताया। गोदियाल ने नैनीताल के एसएसपी से मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करने और कानून का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि छुआछूत और भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई स्थान नहीं है।

बीजेपी ने आयोजन से किया किनारा

विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने खुद को शुद्धिकरण यज्ञ से अलग कर लिया है। बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने कहा कि यज्ञ में पार्टी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं था और बीजेपी का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है। फिलहाल हल्द्वानी का रामलीला मैदान इस राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। कांग्रेस इसे दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता का मामला बता रही है, जबकि श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास इसे सनातन और धार्मिक आस्था से जोड़ रहा है। वहीं बीजेपी आयोजन से पूरी तरह पल्ला झाड़ रही है। ऐसे में एक धार्मिक अनुष्ठान अब जाति, सनातन, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की बहस का मुद्दा बन गया है।


36 साल पुराने सरवानंद कौल प्रेमी हत्याकांड में SIA की बड़ी कार्रवाई, कश्मीर में 9 ठिकानों पर छापेमारी

जम्मू-कश्मीर में 36 साल पुराने सरवानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल के दोहरे हत्याकांड की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने बुधवार को इस मामले में जम्मू-कश्मीर के 9 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के मुताबिक, राजौरी जिले के दूरदराज इलाकों में 6 स्थानों, जम्मू जिले में 2 और कश्मीर में एक ठिकाने पर छापेमारी की गई। यह मामला 1990 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड से जुड़ा है, जिसकी FIR अनंतनाग के डोरू पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। फिलहाल मामले की जांच SIA कर रही है।

क्या हुआ था 1990 में?

सरवानंद कौल प्रेमी कश्मीर के जाने-माने कवि, लेखक और समाजसेवी थे। वह अनंतनाग के कोकेरनाग क्षेत्र के सोअफ शाली के रहने वाले थे। अप्रैल 1990 के आखिरी दिनों में आतंकियों ने सरवानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल का कथित तौर पर अपहरण कर लिया था। इसके बाद दोनों की हत्या कर दी गई। 1 मई 1990 को पिता-पुत्र के शव पेड़ से लटके मिले थे। यह घटना कश्मीर में उस दौर की हिंसा से जुड़े चर्चित मामलों में शामिल रही है।

नए सुरागों की भी हो रही जांच

SIA की ताजा कार्रवाई को पुराने मामले की जांच में सामने आए नए विवरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, एजेंसी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि बुधवार की तलाशी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ या जांच में कौन से नए तथ्य सामने आए हैं। 1990 के दौर से जुड़े पुराने हत्याकांडों की जांच में हाल के समय में तेजी देखी जा रही है। ऐसे में सरवानंद कौल प्रेमी हत्याकांड में 9 ठिकानों पर हुई यह कार्रवाई जांच के लिहाज से अहम मानी जा रही है।


रील का मोह, इन्फ्लुएंसर्स का असर और शॉर्टकट का खतरा... PM मोदी का Gen-Z को संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजय: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व, संघर्ष और उनके कार्यकाल की जमकर सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति के रूप में एक मिसाल कायम की। पद से मुक्त होने के बाद भी वह देश के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कोविंद ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष हैं।

‘कोविंद की सफलता लोकतंत्र की जीत’

आत्मकथा के विमोचन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि किताब का शीर्षक बिल्कुल उपयुक्त है। इसमें रामनाथ कोविंद के व्यक्तिगत जीवन और संघर्ष की कहानी है, लेकिन उनकी सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह भारतीय गणतंत्र और लोकतंत्र की जीत भी है। प्रधानमंत्री ने देश की नई पीढ़ी से इस किताब को पढ़ने और रामनाथ कोविंद के अनुभवों से सीख लेने की अपील की।

जब प्रोटोकॉल से हटकर PM को विदा करते थे कोविंद

पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद के साथ अपने पुराने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के तौर पर जब वह राष्ट्रपति भवन में कोविंद से मिलने जाते थे, तो कई बार प्रोटोकॉल से हटकर पूर्व राष्ट्रपति उनसे सहजता से बातचीत करते थे। पीएम मोदी के मुताबिक, मुलाकात के बाद रामनाथ कोविंद खुद प्रधानमंत्री को विदा करने के लिए कार के दरवाजे तक आते थे। उन्होंने कई बार कोविंद से ऐसा न करने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी विनम्रता और सहजता में कोई बदलाव नहीं आया। प्रधानमंत्री ने कोविंद के गांव परौंख का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बनने के बाद जब कोविंद अपने गांव पहुंचे तो उन्होंने अपने शिक्षकों के पैर छुए, गांव की मिट्टी को नमन किया और ग्रामीणों के प्रति आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद के इस व्यवहार ने देश और दुनिया के सामने भारत के संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों की एक खास तस्वीर पेश की।

Gen-Z को PM मोदी की ‘शॉर्टकट’ वाली सीख

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया और Gen-Z को लेकर भी अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया के दौर में कई इन्फ्लुएंसर्स युवाओं को आकर्षित करते हैं, लेकिन इस शॉर्टकट के दौर में युवाओं को सावधान रहने की जरूरत है। रेलवे स्टेशन का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कई लोग पुल का इस्तेमाल करने के बजाय जल्दबाजी में पटरी पार करने की कोशिश करते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा—“A shortcut will cut you short.” यानी गलत शॉर्टकट आपको मंजिल तक पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि अगर वे जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं और दूसरों के अनुभवों से सीखना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद के लोगों की ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़नी चाहिए। उनका कहना था कि महान लोगों के जीवन के संघर्ष और अनुभव युवाओं को सही दिशा दिखाने में मदद कर सकते हैं।


रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के बाद बढ़ा आक्रोश, अनशन जारी; बोले- मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे

रांची: 10 अगस्त की रात रांची की सड़कों पर JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस ने रात के अंधेरे में उन पर लाठियां बरसाईं और पानी की बौछारें कीं, जिसमें कई छात्र घायल हुए। घटना के बाद प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें अभ्यर्थी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। रांची के धुर्वा मोड़ और धरना स्थल पर आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि लाठीचार्ज के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनकी प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को पूरा करना शामिल है।

8वें दिन भी जारी रूपेश पाल का अनशन

JPSC अभ्यर्थी रूपेश कुमार पाल आठवें दिन भी भूख हड़ताल पर डटे हैं। उनका कहना है कि पुलिस की लाठियां और पानी की बौछारें उनके हौसले को नहीं तोड़ सकतीं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं होता, अनशन और प्रदर्शन जारी रहेगा। रूपेश के मुताबिक, वह वर्ष 2020 से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने 11वीं से 13वीं JPSC तक की परीक्षाएं दी हैं और 14वीं JPSC PT में भी शामिल हुए थे। उनका आरोप है कि हर बार किसी न किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है। रूपेश ने बताया कि वह किसान परिवार से आते हैं। परिवार में चार बहनें और दो भाई हैं। उनके बड़े भाई सरकारी नौकरी में हैं, जिससे परिवार का खर्च चल रहा है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति ऐसी है कि बार-बार परीक्षा की तैयारी करना भी मुश्किल हो जाता है।  उन्होंने बताया कि 10 अगस्त की घटना के बाद अलग-अलग इलाकों से छात्र धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। फिलहाल आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर कोर कमेटी में चर्चा चल रही है और प्रदर्शनकारी सरकार के साथ बातचीत का इंतजार कर रहे हैं।
लाठीचार्ज के बाद भी भूख हड़ताल पर बैठे राहुल कुमार ने सरकार और सत्ताधारी नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान हिंसा की शुरुआत पुलिस की ओर से हुई। राहुल ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है तो आंदोलन को गांव और प्रखंड स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने नेताओं के कार्यक्रमों के बहिष्कार की बात भी कही।  हालांकि, राहुल के बयान में नेताओं को डंडे से दौड़ाने जैसी चेतावनी भी सामने आई है। यह बयान आंदोलन के बढ़ते आक्रोश को दर्शाता है, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा या टकराव की स्थिति कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

CBI जांच की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

धरना स्थल पर देवेंद्र नाथ महतो, राहुल क्रांति, रूपेश कुमार पाल, हबीबा और सविता कुमारी समेत कई अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल सरकारी नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की भी है। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण बड़ी संख्या में युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। 
10 अगस्त की रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और अधिक तेज होता दिखाई दे रहा है। अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार की ओर से होने वाली संभावित वार्ता पर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।


JNU में फिर लगे उमर खालिद की रिहाई के नारे, बढ़ा तनाव

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) सोमवार को एक बार फिर नए विवाद से चर्चा में आ गया है. सामने आया है कि यहां एक कार्यक्रम के दौरान जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने 'उमर खालिद की रिहाई' की मांग को लेकर नारेबाजी की. आरोप है कि JNUSU  ने SSS-2 बिल्डिंग के बाहर 'उमर खालिद को रिहा करो' और 'जेल के ताले टूटेंगे, सारे साथी छूटेंगे' जैसे नारे लगाए.
 
असल में सोमवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में उमर खालिद की किताब 'Fractured Communities' पर चर्चा आयोजित की गई थी. इसी किताब पर चर्चा के दौरान विवाद हो गया. इसी दौरान (JNUSU) के छात्र नेता 'उमर खालिद को रिहा करो' जैसे नारे लगाने लगे. इसके जवाब में कार्यक्रम का विरोध कर रहे ABVP समर्थकों ने 'खालिद पाकिस्तानी है' जैसे नारे लगाए... JNUSU ने उमर खालिद की किताब पर चर्चा के लिए कार्यक्रम आयोजित किया था. छात्र संघ के मुताबिक, JNU प्रशासन ने आखिरी समय में कार्यक्रम के लिए ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी. इसके बावजूद JNUSU ने कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया और बाद में इसे SSS-2 बिल्डिंग के बाहर किया गया. इस दौरान ABVP समर्थक भी मौके पर पहुंचे और कार्यक्रम के खिलाफ नारेबाजी की. दोनों पक्षों की ओर से नारे लगाए जाने के कारण कार्यक्रम के दौरान तनाव की स्थिति बन गई... 

घटना के बाद JNUSU ने बयान जारी कर JNU प्रशासन पर कार्यक्रम की अनुमति आखिरी समय में रद्द करने का आरोप लगाया. छात्र संघ ने प्रशासन को 'संघी प्रशासन' बताते हुए दावा किया कि यह कदम विश्वविद्यालय में बहस, चर्चा और असहमति की संस्कृति को सीमित करने की कोशिश है. JNUSU ने दावा किया कि अनुमति रद्द होने और विरोध के बावजूद सैकड़ों छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए. छात्र संघ के मुताबिक, इससे छात्रों ने यह संदेश दिया कि वे विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

JNUSU ने ABVP पर भी कार्यक्रम बाधित करने का आरोप लगाया. छात्र संघ ने दावा किया कि ABVP समर्थकों ने स्पीकर से माइक्रोफोन छीनने की कोशिश की और पैनलिस्टों के साथ दुर्व्यवहार किया. हालांकि, इन आरोपों पर ABVP या JNU प्रशासन की प्रतिक्रिया का विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं है.


देशभर में बारिश का कहर, जम्मू में अमरनाथ यात्रा रुकी, दिल्ली-NCR में जलभराव

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून की बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली-NCR, बिहार, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक भारी बारिश के कारण जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ जैसी स्थिति सामने आ रही है। खराब मौसम को देखते हुए शनिवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा रोक दी गई। वहीं दिल्ली-NCR में तेज बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या देखने को मिली।जम्मू-कश्मीर में बारिश और लैंडस्लाइड का खतरा, अमरनाथ यात्रा रोकी, जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए शनिवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा रोक दी गई। भगवती नगर बेस कैंप से श्रद्धालुओं के नए जत्थे को कश्मीर के लिए रवाना नहीं किया गया। प्रशासन जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में भारी बारिश के कारण जम्मू क्षेत्र में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोका गया है। शनिवार को भी मौसम खराब रहने की आशंका जताई गई थी। इस साल अब तक लाखों श्रद्धालु अमरनाथ गुफा के दर्शन कर चुके हैं। खराब मौसम के कारण यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

दिल्ली-NCR में बारिश से जलभराव, ट्रैफिक प्रभावित

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को हुई तेज बारिश ने कई जगहों पर यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया। दिल्ली के साथ गुरुग्राम और नोएडा के कुछ हिस्सों में जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हुई और कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक दबाव बढ़ा। गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण कई प्रमुख मार्ग प्रभावित हुए। दिल्ली-NCR में बारिश के कारण रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के आंकड़ों के लिहाज से भी अगस्त की शुरुआत दिल्ली के लिए खास रही है। 1 से 7 अगस्त के बीच राजधानी में 127 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 2011 के बाद अगस्त के पहले सात दिनों में सबसे ज्यादा है। 
हालांकि, शनिवार 8 अगस्त के लिए उपलब्ध ताजा रिपोर्ट में IMD ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और दिन के दौरान बारिश की संभावना जताई गई है।

बिहार में नदियां उफान पर

बिहार में भी लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। बागमती और गंडक समेत कई नदियों में पानी बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पिछली रिपोर्टों में पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के कारण 300 से अधिक घरों के प्रभावित होने और लोगों के सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जानकारी सामने आई थी।

उत्तर प्रदेश में गंगा का जलस्तर बढ़ा

उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर घाटों पर दिखाई दे रहा है। निचले इलाकों में पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। आगरा समेत राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में भी बारिश के कारण सड़क और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की खबरें हैं।

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, सड़कें प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में भी बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। राज्य के कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी के बीच प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। बारिश के कारण पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने और यातायात बाधित होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों, नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक तथा मौसम संबंधी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की जा रही है। फिलहाल जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा रोकने से लेकर दिल्ली-NCR में जलभराव और हिमाचल में सड़क बाधित होने तक, देश के कई हिस्सों में मानसून का असर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।


Gen-Z की नब्ज समझ रहे हैं मोहन भागवत? युवा पीढ़ी से संवाद के पीछे क्या है RSS का संदेश

मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha से मोहन भागवत का संवाद सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती राजनीतिक सोच को समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। विरोध, असहमति, रोजगार, शिक्षा और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर संघ प्रमुख की टिप्पणियों ने RSS-BJP के रिश्ते और युवा वोटरों तक पहुंच की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का 6 अगस्त को मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं के साथ संवाद ऐसे समय हुआ, जब देश में युवाओं से जुड़े कई मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े छात्र आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और सरकार की जवाबदेही जैसे सवालों को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया था। यह आंदोलन 49 दिनों तक चला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ। ऐसे माहौल में भागवत का युवाओं से सीधे संवाद करना महज एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा। इसे RSS की उस कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसमें वह नई पीढ़ी के सवालों, असंतोष और राजनीतिक सोच को समझने की कोशिश कर रहा है।

Gen-Z देश-विरोधी नहीं, भागवत का सबसे अहम संदेश

मुंबई में बातचीत के दौरान मोहन भागवत ने Gen-Z के विरोध और असहमति को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युवाओं का विरोध करना उन्हें देश-विरोधी नहीं बनाता। उनके मुताबिक विरोध करने वाले भी देश और समाज का ही हिस्सा हैं। भागवत ने युवाओं को ईमानदार, देशभक्त और सेवा की भावना रखने वाली पीढ़ी के रूप में पेश किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युवाओं के सवालों को केवल विरोध के नजरिए से नहीं, बल्कि उन समस्याओं के संदर्भ में समझना चाहिए जिनसे वे जूझ रहे हैं।
यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में युवाओं के नेतृत्व वाले CJP आंदोलन के दौरान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली थी। आंदोलन की शुरुआत परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई थी, लेकिन बाद में इसमें रोजगार, जवाबदेही और शासन से जुड़े व्यापक सवाल भी शामिल हो गए।

विरोध लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन तरीका भी महत्वपूर्ण

भागवत ने युवाओं के विरोध करने के अधिकार को खारिज नहीं किया। उनका संदेश यह था कि जब बातचीत और संवाद के रास्ते बंद होते हैं, तब विरोध किसी मुद्दे को सार्वजनिक बहस में लाने का माध्यम बन सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं था कि उन्होंने विरोध के हर तरीके का समर्थन किया। उन्होंने आंदोलन के तरीके और लोकतांत्रिक मर्यादा की जरूरत पर भी जोर दिया। यही अंतर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। किसी आंदोलन की मांग और उसके दौरान अपनाए गए हर तरीके को एक ही नजरिए से देखने के बजाय भागवत ने शिकायत और विरोध के तरीके को अलग-अलग करके देखने का संकेत दिया।

Gen-Z की राजनीति, क्यों का जवाब चाहिए

भागवत के संवाद का एक बड़ा संदेश युवा पीढ़ी की बदलती सोच को लेकर था। Gen-Z ऐसी पीढ़ी है जो राजनीतिक भाषणों को सिर्फ सुनती नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर तुरंत उनकी जांच, तुलना और आलोचना भी करती है। इस पीढ़ी के लिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि कोई निर्णय सही है क्योंकि उसे सत्ता में बैठे लोगों ने लिया है। सवाल यह है कि निर्णय क्यों लिया गया, उसका आधार क्या है और उसका असर आम लोगों पर क्या पड़ेगा। यही वजह है कि शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे युवाओं के बीच तेजी से राजनीतिक मुद्दे बनते हैं। CJP आंदोलन इसका एक उदाहरण रहा। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह अभियान कुछ ही समय में जंतर-मंतर के बड़े युवा आंदोलन में बदल गया। Reuters के मुताबिक, आंदोलन की जड़ें बेरोजगारी और परीक्षा में पेपर लीक को लेकर युवाओं की नाराजगी में थीं।
RSS के लिए युवा क्यों महत्वपूर्ण हैं?

नई पीढ़ी से संवाद RSS के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Gen-Z का राजनीतिक जुड़ाव पारंपरिक संगठनों से अलग तरीके से बन रहा है। सोशल मीडिया, मीम्स, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल कम्युनिकेशन ने राजनीतिक संवाद की भाषा बदल दी है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान भी युवाओं ने पारंपरिक राजनीतिक रैलियों के बजाय मीम, व्यंग्य, सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल कैंपेन को आंदोलन की भाषा बनाया। ऐसे में RSS के सामने चुनौती सिर्फ युवाओं को अपने विचार समझाने की नहीं, बल्कि उनकी भाषा और उनके सवालों को समझने की भी है। मुंबई में भागवत का संवाद इसी दिशा में एक प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है। BJP-RSS रिश्ते के बीच भी

अहम है यह संदेश

RSS और BJP के रिश्ते को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक बहस होती रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि पार्टी अब उस दौर से आगे निकल चुकी है जब उसे हर स्तर पर RSS के सहारे की जरूरत होती थी। इस बयान को दोनों संगठनों के रिश्तों के संदर्भ में देखा गया था। चुनाव परिणामों के बाद मोहन भागवत ने सार्वजनिक जीवन में विनम्रता, मर्यादा और विपक्ष को दुश्मन नहीं मानने जैसे मुद्दों पर जोर दिया था। इन टिप्पणियों को राजनीतिक हलकों में BJP के लिए अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में भी देखा गया। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि भागवत की हर टिप्पणी सीधे BJP की रणनीति या सरकार की आलोचना होती है। RSS और BJP के रिश्ते जटिल हैं और दोनों के बीच संवाद तथा वैचारिक निकटता के बावजूद संगठनात्मक भूमिकाएं अलग हैं। क्या RSS युवा वोटरों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है? मुंबई का कार्यक्रम इस सवाल को जरूर जन्म देता है। भागवत ने युवाओं से यह नहीं कहा कि वे सवाल पूछना बंद करें। उन्होंने असहमति को देश-विरोध के बराबर मानने से भी इनकार किया। इसके बजाय उन्होंने संवाद, तर्क और जवाबदेही पर जोर दिया। राजनीतिक रूप से इसका मतलब यह हो सकता है कि RSS नई पीढ़ी के साथ संवाद की ऐसी भाषा तलाश रहा है, जिसमें राष्ट्रवाद और संगठनात्मक विचारधारा के साथ-साथ युवाओं की व्यक्तिगत समस्याओं और आकांक्षाओं को भी जगह मिले। लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इससे BJP की राजनीतिक रणनीति में तत्काल कोई बड़ा बदलाव आएगा।

असली चुनौती भाषा नहीं, सोच बदलने की

मोहन भागवत का Gen-Z के साथ संवाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत जरूर है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में युवा मुद्दों पर BJP और RSS की जमीन पर क्या रणनीति दिखाई देती है। सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा बदलना आसान है। मुश्किल यह है कि युवाओं के सवालों को वास्तव में सुनना, उनके असंतोष को समझना और उन सवालों का ठोस जवाब देना। Gen-Z को केवल वोट बैंक की तरह देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा। यह पीढ़ी सवाल पूछती है, जवाब मांगती है और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरने से भी नहीं हिचकती। मुंबई में मोहन भागवत का संदेश इसी बदलती राजनीतिक मनोवृत्ति को पहचानने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। अब देखना यह होगा कि यह संवाद केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रहता है या आने वाले समय में BJP-RSS की युवा नीति और राजनीतिक भाषा में भी इसका असर दिखाई देता है। 


अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान की सड़क हादसे में मौत, कार डिवाइडर से टकराई

प्रयागराज/झांसी: माफिया से नेता बने दिवंगत अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसा झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में हुआ, जिसमें अबान समेत तीन लोगों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सभी लोग प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान हाईवे पर उनकी तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं। 
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने अबान अहमद सहित तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया। घायल मोहम्मद जैद, उमर और एक अन्य व्यक्ति का इलाज जारी है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा तेज रफ्तार, चालक के नियंत्रण खोने या किसी अन्य वजह से हुआ। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और क्षतिग्रस्त वाहन की भी जांच की जा रही है। अबान अहमद, अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटों में से एक था। उमेश पाल हत्याकांड के बाद अबान और उसके भाई अहजम को नाबालिग होने के कारण बाल संरक्षण गृह भेजा गया था। बाद में अक्टूबर 2023 में दोनों को उनकी बुआ की सुपुर्दगी में रिहा किया गया था।

गौरतलब है कि अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को नैनी सेंट्रल जेल से झांसी जेल स्थानांतरित किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अबान और परिवार के अन्य सदस्य उसी से मुलाकात करने झांसी जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। इस घटना के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है


यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला

by न्यूज डेस्क

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 'तहलका' पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने वर्ष 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया था। यह मामला नवंबर 2013 का है, जब 'तहलका' की एक पूर्व महिला सहयोगी ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित पत्रिका के वार्षिक कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने दो अलग-अलग मौकों पर लिफ्ट के भीतर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता की शिकायत के आधार पर गोवा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की सुनवाई के बाद मापुसा की सत्र अदालत ने मई 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में जांच और अभियोजन पक्ष की कार्यवाही पर कई सवाल उठाए थे। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया और कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों के बयानों का समुचित मूल्यांकन आवश्यक था। अदालत ने अपने निर्णय में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। सजा (Quantum of Sentence) पर आदेश अलग से सुनाया जाएगा। यह मामला देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में से एक रहा है और इसके फैसले पर लंबे समय से कानूनी और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई थी।


PM मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने वाली नाबालिग को बड़ी राहत, शिकायतकर्ता ने वापस ली FIR

by न्यूज डेस्क

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में नया मोड़ आया है. शिकायत दर्ज कराने वाली स्मृति सिंह ने अपनी शिकायत वापस लेने का फैसला किया है. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की ओर से बच्चों को माफ किए जाने और नाबालिग की सार्वजनिक माफी के बाद उन्होंने यह कदम उठाया.जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल का मामला अब नए दौर में पहुंच गया है. गाजियाबाद की रहने वाली स्मृति सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एक नाबालिग के खिलाफ नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दी थी. घटना दिल्ली की होने की वजह से इसे जीरो FIR के रूप में दर्ज किया गया था. इसके बाद जांच दिल्ली पुलिस को सौंप दी गई.

स्मृति सिंह का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और उनकी मां के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. इसी वजह से उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी. हालांकि अब, प्रधानमंत्री की ओर से बच्चों को माफ किए जाने और नाबालिग की सार्वजनिक माफी के बाद उन्होंने शिकायत वापस लेने का फैसला किया है.


E20 विवाद, बॉम्बे हाईकोर्ट से नितिन गडकरी को अंतरिम राहत

by न्यूज डेस्क

मुंबई/ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को E20 फ्यूल विवाद से जुड़े कथित डीपफेक (Deepfake) और AI जनरेटेड आपत्तिजनक कंटेंट मामले में बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित गडकरी से जुड़े कथित फर्जी वीडियो और AI से तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरों को तत्काल हटाने का अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि इस तरह का कंटेंट सार्वजनिक मंचों पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

क्या है पूरा मामला?
नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने E20 फ्यूल नीति को लेकर उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से डीपफेक वीडियो और AI जनरेटेड फर्जी तस्वीरें प्रसारित की हैं। इनमें से एक वीडियो इंस्टाग्राम रील के रूप में वायरल हुआ था, जबकि अन्य तस्वीरों और पोस्ट में भी उनके नाम और तस्वीर का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। याचिका में कहा गया कि यह सामग्री न केवल भ्रामक है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली भी है।

कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए कंटेंट का अवलोकन किया। अदालत ने प्रारंभिक तौर पर माना कि संबंधित सामग्री अत्यंत आपत्तिजनक, अश्लील और अपमानजनक प्रतीत होती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कंटेंट का सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कोई स्थान नहीं है, क्योंकि इसे बच्चे, युवा और आम नागरिक भी आसानी से देख सकते हैं। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत पाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है।

Meta और Google ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान Meta और Google की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचिका के Exhibit-C में सूचीबद्ध सभी आपत्तिजनक लिंक और सामग्री को संबंधित प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अदालत ने कंपनियों के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का अंतरिम आदेश जारी किया।

4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। तब तक संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए विवादित सामग्री हटानी होगी और आगे की कार्रवाई पर अपना पक्ष रखना होगा। 
हाल के वर्षों में Artificial Intelligence (AI) और Deepfake तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने फर्जी वीडियो और तस्वीरों के जरिए गलत सूचना फैलाने की घटनाओं में तेजी लाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की छवि खराब करने और गलत जानकारी फैलाने के लिए इस तकनीक का दुरुपयोग एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश ऐसे मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और फर्जी AI कंटेंट पर न्यायपालिका के सख्त रुख को भी दर्शाता है।


रांची में 12वें दिन भी जारी आंदोलन, सोनम वांगचुक के आग्रह पर देवेंद्र महतो ने जल ग्रहण किया

by न्यूज डेस्क

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा यह प्रदर्शन मंगलवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच आंदोलन को उस समय नया मोड़ मिला, जब लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने आंदोलन का समर्थन करते हुए फोन पर अनशन पर बैठे JLKM के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की। कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो ने पहले शर्त रखी थी कि वे तभी अपना अनशन तोड़ेंगे, जब सोनम वांगचुक स्वयं रांची आकर उनसे मुलाकात करेंगे। हालांकि स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने की आशंका के बीच वांगचुक ने फोन पर उनसे बातचीत कर सेहत का ख्याल रखने की अपील की।

वांगचुक के आग्रह पर पिया पानी

फोन पर हुई बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने देवेंद्र महतो से कहा कि आंदोलन का उद्देश्य खुद को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकार तक छात्रों की आवाज पहुंचाना है। उन्होंने महतो से आग्रह किया कि वे कम से कम पानी और शहद लें ताकि उनका स्वास्थ्य अधिक न बिगड़े और आंदोलन जारी रह सके। लंबी बातचीत और लगातार समझाने के बाद देवेंद्र महतो ने वांगचुक की बात मानते हुए जल ग्रहण किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन और सरकार के खिलाफ विरोध जारी रहेगा। बातचीत के दौरान देवेंद्र महतो ने कहा कि वे सोनम वांगचुक का बहुत सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि वे रांची आकर छात्रों का समर्थन करें। इस पर वांगचुक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही रांची पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की कोशिश करेंगे। वांगचुक ने कहा कि लंबे समय तक बिना पानी और नमक के अनशन करना शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी के अनशन का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधीजी भी उपवास के दौरान पानी में नींबू मिलाकर लेते थे ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि पानी, शहद और नींबू जैसी चीजें शरीर को आवश्यक ऊर्जा देती हैं और आंदोलन को लंबे समय तक जारी रखने में मदद करती हैं।

क्यों हो रहा आंदोलन?

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। छात्रों का आरोप है कि JPSC, JSSC, CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें 
JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच
दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई
भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता सुनिश्चित करना
भविष्य में परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से करवाना 

छात्रों के इस आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी ओर, देवेंद्र महतो के स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और डॉक्टरों ने भी चिंता जताई थी। सोनम वांगचुक के हस्तक्षेप के बाद उनके पानी ग्रहण करने से समर्थकों ने कुछ राहत की सांस ली है। वहीं खबर लिखे जाने तक झारखंड सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त कराने या छात्रों की मांगों पर किसी बड़े फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। अब देखना होगा कि आगे ये आंदोलन क्या मोड़ लेता है 


लोकसभा में विरोध के बावजूद एप्रोप्रिएशन बिल पास , ध्वनिमत से मिली मंजूरी

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच 'द एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल, 2026' को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विपक्षी सांसद पूरे समय सदन के वेल में विरोध प्रदर्शन करते रहे, जबकि सरकार वित्तीय कार्यवाही आगे बढ़ाने पर अड़ी रही। हंगामे के कारण विधेयक पर सामान्य चर्चा नहीं हो सकी और अंततः स्पीकर ने ध्वनिमत से इसे मंजूरी दे दी।  लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सरकारी खर्च से जुड़े प्रावधानों पर निर्धारित चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की। हालांकि विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी, जिसके बाद सदन ने बिना विस्तृत बहस के विधेयक को पारित कर दिया।

क्या है एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल?

द एप्रोप्रिएशन (No. 3) Bill, 2026 संसद की वित्तीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार को भारत की संचित निधि से संसद द्वारा स्वीकृत धनराशि निकालने और विभिन्न मंत्रालयों व सरकारी योजनाओं पर खर्च करने का कानूनी अधिकार मिलता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 114 के अनुसार, संसद की मंजूरी के बिना संचित निधि से कोई भी राशि खर्च नहीं की जा सकती। इसी संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एप्रोप्रिएशन बिल पारित किया जाता है।

हंगामे के कारण नहीं हो सकी सामान्य चर्चा

विधेयक पर चर्चा शुरू होने से पहले ही विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सरकार चाहती थी कि वित्तीय प्रस्तावों पर सदन में चर्चा हो, लेकिन लगातार विरोध के कारण कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। विपक्ष के हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने विधेयक को ध्वनिमत के लिए रखा और सदन ने इसे मंजूरी दे दी।

बिल पारित होने के बाद भी जारी रहा विरोध

एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल पारित होने के बाद भी विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। सदन में लगातार शोर-शराबे की स्थिति बनी रहने के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अब संसद के वित्तीय एजेंडे के तहत अगला महत्वपूर्ण चरण फाइनेंस बिल पर चर्चा और उससे जुड़ी कार्यवाही होगी।

क्यों अहम है यह विधेयक?

एप्रोप्रिएशन बिल के जरिए संसद पहले से स्वीकृत Demands for Grants के तहत सरकारी खर्च को कानूनी मंजूरी देती है। इसके अलावा, 'Charged Expenditure' यानी ऐसे खर्च, जिन पर लोकसभा में मतदान नहीं होता लेकिन जिन्हें संचित निधि से भुगतान किया जाना होता है, उन्हें भी इसी विधेयक के माध्यम से वैधानिक आधार मिलता है। 
इसलिए एप्रोप्रिएशन बिल के पारित होने के बाद ही केंद्र सरकार स्वीकृत बजटीय प्रावधानों के अनुरूप सरकारी व्यय कर सकती है।


दिल्ली फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस, 12 यात्री और क्रू मेंबर घायल

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: थाईलैंड के फुकेट (Phuket) से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 मंगलवार को दिल्ली पहुंचने से पहले तेज टर्बुलेंस (वायुमंडलीय अशांति) की चपेट में आ गई। उड़ान के दौरान अचानक आए तेज झटकों के कारण विमान में सवार 12 लोग, जिनमें यात्री और चालक दल (क्रू) के सदस्य शामिल हैं, घायल हो गए। विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद सभी प्रभावित लोगों को एहतियात के तौर पर दिल्ली एयरपोर्ट स्थित मेडिकल सुविधा केंद्र ले जाया गया, जहां उनका इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, फ्लाइट जब दिल्ली के करीब पहुंच रही थी, तभी उसे अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों ने बताया कि विमान कुछ क्षणों के लिए तेजी से नीचे आया और जोरदार हिचकोले खाने लगा, जिससे केबिन में अफरा-तफरी मच गई। कई यात्रियों को सीटों और केबिन के हिस्सों से टकराने के कारण चोटें आईं। घायलों के परिजनों के अनुसार, एक यात्री के कान पर दबाव इतना अधिक पड़ा कि उसके कान का पर्दा प्रभावित हो गया। वहीं कुछ अन्य यात्रियों को गर्दन, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। हालांकि एयर इंडिया ने आधिकारिक तौर पर केवल इतना कहा है कि कुछ यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मामूली चोटें आई हैं और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा तथा उनका स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। एयरलाइन संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर घटना की जांच में पूरा सहयोग कर रही है।"

क्या होता है एयर टर्बुलेंस?

एयर टर्बुलेंस वह स्थिति है, जब विमान के आसपास हवा का प्रवाह अचानक अस्थिर और अनियमित हो जाता है। इसके कारण विमान को तेज झटके महसूस होते हैं। टर्बुलेंस कई कारणों से हो सकता है, जैसे:
गरज-चमक वाले बादल और खराब मौसम
ऊंचाई पर बहने वाली तेज जेट स्ट्रीम
गर्म और ठंडी हवा के टकराने से बनने वाली वायुमंडलीय अशांति
पहाड़ों के ऊपर बनने वाली एयर वेव्स

क्लियर एयर टर्बुलेंस (CAT), जो बिना बादलों के भी हो सकता है और पायलट के लिए पहले से पहचानना कठिन होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, टर्बुलेंस आमतौर पर विमान की संरचनात्मक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा नहीं होता, लेकिन यदि यात्री सीट बेल्ट नहीं लगाए हों तो चोट लगने का जोखिम बढ़ जाता है। इसी वजह से उड़ान के दौरान सीट पर बैठे समय हमेशा सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है।


बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने मारी बाजी, दतिया में कांग्रेस और मंजलपुर में BJP की जीत

by newsdesk

बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने मारी बाजी, दतिया में कांग्रेस और मंजलपुर में BJP की जीत

तीन राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे अब लगभग साफ हो गए हैं। बिहार की सबसे चर्चित बांकीपुर सीट पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दोपहर बाद ही निर्णायक बढ़त बना ली थी...जो आगे तक कायम रही... वहीं मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार ने बढ़त ली थी... और अब जीत हासिल की ... जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट पर भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज कर ली है। मतगणना 3 अगस्त को हुई, जबकि मतदान 30 जुलाई को कराया गया था।
बिहार: बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बाजी
बांकीपुर विधानसभा सीट पर 26वें राउंड की मतगणना तक जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को 53,566 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 37,702 वोट प्राप्त हुए । इस तरह प्रशांत किशोर ने 15,864 से ज्यादा वोटों से बड़ी जीत हासिल की ।
यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक रहे थे। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद सीट खाली हुई, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया गया। यदि यह बढ़त अंतिम नतीजे तक कायम रहती है, तो इसे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
मध्य प्रदेश: दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार जीते
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह बढ़त बनाए हुए थे। 13वें राउंड की मतगणना तक उन्हें 61,677 वोट मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 50,623 वोट प्राप्त हुए थे। भाजपा ने इस उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को करीब 10 हजार वोटों की बढ़त मिलती दिखाई दी। और बाद में उन्होने ही जीत हासिल की .. 
गुजरात: मंजलपुर सीट बीजेपी ने बड़े अंतर से जीती
गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतीश (सतेन्द्रभाई) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,499 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की है। इस सीट पर 30 जुलाई को हुए मतदान में लगभग 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। मंजलपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है और इस उपचुनाव में भी पार्टी ने अपना कब्जा बरकरार रखा।
उपचुनाव क्यों हुए?
इन तीनों सीटों पर अलग-अलग कारणों से उपचुनाव कराए गए।
बिहार (बांकीपुर): नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद सीट खाली हुई।
मध्य प्रदेश (दतिया): कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव हुआ ।
गुजरात (मंजलपुर): भाजपा विधायक के निधन के कारण सीट रिक्त हुई।
तीन राज्यों के उपचुनावों की तस्वीर अब लगभग साफ हो चुकी है...  बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने जीत हासिल की... जबाकि दतिया में कांग्रेस और मंजलपुर में BJP ने बीजेपी ने बाजी मार ली...


केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया

by khabarcare

नई दिल्ली, 16 जून 2026: केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशभर में लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम परीक्षा से जुड़े फर्जी पेपर लीक, धोखाधड़ी वाले रैकेट्स और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।

फैसले की मुख्य बातें

  • प्रतिबंध की अवधि: टेलीग्राम एक्सेस पर 22 जून 2026 तक रोक रहेगी, यानी री-एग्जाम (21 जून) और उसके तुरंत बाद का समय कवर होगा।
  • कानूनी आधार: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत निर्देश जारी किए। यह NTA की सिफारिश पर आधारित है।
  • अतिरिक्त उपाय: टेलीग्राम को भारत में पहले से पोस्ट किए गए मैसेजों की एडिटिंग फीचर को 30 जून तक डिसेबल करने का निर्देश दिया गया है, ताकि गलत सूचना फैलाने में आसानी न हो।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इस फैसले का स्वागत किया है। NTA के बयान में कहा गया कि बड़े पैमाने पर चैनल्स, ग्रुप्स और बॉट्स को ब्लॉक करने के बावजूद धोखाधड़ी वाले तत्व सक्रिय थे, इसलिए यह सीमित और लक्षित कदम जरूरी था।

पृष्ठभूमि

NEET-UG 2026 का मूल परीक्षा 3 मई को हुई थी, जिसे पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया था। CBI जांच चल रही है। री-एग्जाम 21 जून 2026 (रविवार) को दोपहर 2:00 बजे से 5:15 बजे तक 551 शहरों में आयोजित होगा।

परीक्षा की सुरक्षा के लिए कई कड़े इंतजाम किए गए हैं, जैसे:

  • सशस्त्र एस्कॉर्ट के साथ पेपर ट्रांसपोर्ट
  • AI मॉनिटरिंग वाली CCTV
  • बायोमेट्रिक्स और जammers
  • PMO स्तर की निगरानी

छात्रों और अभिभावकों के लिए सलाह

  • परीक्षा से संबंधित सभी अपडेट केवल आधिकारिक NTA वेबसाइट और उनके सोशल मीडिया हैंडल से लें।
  • अफवाहों पर ध्यान न दें। टेलीग्राम प्रतिबंध अस्थायी है और परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए है।
  • एडमिट कार्ड और अन्य दस्तावेज पहले से तैयार रखें।

सरकार और NTA का कहना है कि यह कदम छात्रों के हित में है और परीक्षा निष्पक्ष रूप से आयोजित होगी। 22 जून के बाद सेवाएं सामान्य हो जाएंगी।

अपडेट: यह जानकारी 16 जून 2026 की नवीनतम रिपोर्ट्स पर आधारित है। स्थिति में कोई बदलाव होने पर NTA तुरंत सूचित करेगा।

यह समाचार पूरी तरह तथ्यों पर आधारित और मूल रूप से तैयार किया गया है। छात्रों से अपील है कि वे शांत रहें और तैयारी पर फोकस करें।


आपके फोन में भी तेज सायरन की आवाज सुनाई दी? घबराएं नहीं, ये बस ट्रायल अलर्ट था

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नई दिल्ली ०२ मई २०२६ : देशभर में आज यानी दो मई को करोड़ों लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक तेज सायरन जैसी आवाज सुनाई देने लगी, जिससे सभी घबरा गए। अगर आपके भी मोबाइल फोन पर सायरन बजा हो तो घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह किसी आपदा का संकेत नहीं, बल्कि सरकार द्वारा किए जा रहे एक टेस्ट का हिस्सा है। दरअसल, भारत सरकार का Department of Telecommunications (DoT) और National Disaster Management Authority (NDMA) ने साथ मिलकर एक नए मोबाइल आधारित आपदा चेतावनी सिस्टम का परीक्षण किया है। इस सिस्टम का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति जैसे भूकंप, बाढ़ या चक्रवात के समय लोगों को तुरंत अलर्ट करना है। इस सिस्टम को SACHET (नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल) नाम दिया गया है। इससे पहले भी इसे दिल्ली-एनसीआर और अन्य बड़े शहरों में टेस्ट किया जा चुका है।


मई के पहले दिन फूटा महंगाई बम! 19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर 993 रुपये महंगा, अब दिल्ली में 3071.50 रुपये

by newsdesk

मई की शुरुआत के साथ ही आम लोगों और कारोबारियों पर महंगाई का नया झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने आज से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी है। एक सिलेंडर पर औसतन 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद दिल्ली में इसकी नई कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है।

घरेलू सिलेंडर की कीमत में राहत, लेकिन व्यापारियों पर बोझ

घरेलू उपयोग के 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में यह अभी भी 913 रुपये में उपलब्ध है। सरकार ने आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए घरेलू सिलेंडर को स्थिर रखा है।

हालांकि, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे-बड़े खाद्य व्यवसायों पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ेगा। ये सभी मुख्य रूप से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।

5 किलो LPG सिलेंडर भी हुआ महंगा

कमर्शियल श्रेणी के छोटे 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर (FTL - Free Trade LPG) की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। विभिन्न शहरों में यह लगभग 51 रुपये तक महंगा हो गया है। इससे पहले अप्रैल में भी 5 किलो सिलेंडर पर 51 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई थी।

क्यों बढ़ी कीमतें?

तेल कंपनियों के अनुसार, इस भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उछाल है। अमेरिका-ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और हार्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के चलते वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जो मार्च-अप्रैल के बाद मई में आई है।


ट्रंप बोले- ईरान का तेल लेना हमारा पसंदीदा विकल्प, खार्ग द्वीप आसानी से कब्जा कर सकते हैं

ईरान-अमेरिका जंग 30वें दिन में प्रवेश, ईरान ने जमीनी हमले की चेतावनी दी

by KhabarCafe

न्यूज डेस्क, 30 मार्च 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जे की संभावना जताई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का पसंदीदा विकल्प "ईरान का तेल लेना" है और खार्ग द्वीप को "बहुत आसानी से" लिया जा सकता है। वहीं ईरान ने अमेरिका को जमीनी आक्रमण से सख्त चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरानी जमीन पर उतरे तो उन्हें "आग में झोंक" दिया जाएगा।

ट्रंप का विवादास्पद बयान

ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा, "मेरा पसंदीदा विकल्प ईरान का तेल लेना है।" उन्होंने खार्ग द्वीप (Kharg Island) का जिक्र करते हुए बताया कि इसे कब्जे में लेना आसान है क्योंकि वहां ईरान की कोई खास रक्षा नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध में ईरान के कई प्रमुख नेता मारे जा चुके हैं, जिसे उन्होंने "रेजीम चेंज" करार दिया।

ट्रंप ने आगे कहा कि बातचीत "बहुत अच्छी" चल रही है और डील जल्द हो सकती है, लेकिन ईरान को अमेरिका की शर्तें माननी होंगी। उन्होंने ईरान की ऊर्जा साइट्स पर हमले 6 अप्रैल तक टाल दिए हैं।

ईरान की सख्त प्रतिक्रिया

ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ और रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी कि अमेरिकी सैनिकों के जमीनी हमले पर उन्हें "आग में झोंक" दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिकी और इजराइली अधिकारियों के निजी आवासों को भी वैध टारगेट बताते हुए हमले की धमकी दी है।

ईरान ने युद्ध रोकने के लिए 5 शर्तें रखी हैं, जिसमें सभी हमले बंद करना, युद्ध क्षति का मुआवजा और हार्मुज जलडमरूमध्य पर अपना अधिकार शामिल है। ईरान ने अमेरिका के 15-पॉइंट प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

सैन्य स्थिति

  • अमेरिका ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त 3,500 मरीन भेजे हैं, अब कुल 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
  • अमेरिका-इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल बेस और विश्वविद्यालयों समेत हजारों टारगेट्स पर हमले किए हैं।
  • ईरान की मिसाइल और वायु रक्षा क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है।

कूटनीतिक प्रयास

क्षेत्रीय देश पाकिस्तान में बैठक कर युद्ध समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-पॉइंट प्रस्ताव दिया था, जिसमें न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करना और हार्मुज में नेविगेशन फ्री रखना शामिल है।

निष्कर्ष: जंग एक महीने पूरा होने को है। ट्रंप "डील" की बात कर रहे हैं, लेकिन दोनों तरफ सैन्य दबाव और चेतावनियां जारी हैं। स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

आपके न्यूज पोर्टल के लिए शॉर्ट वर्जन: ट्रंप: ईरान का तेल लेना चाहते हैं, खार्ग द्वीप पर कब्जा आसान ईरान ने जमीनी हमले की धमकी दी, पाकिस्तान में शांति बैठक। 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात।

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ईरान वॉर का पर्यावरणी तबाही: 14 दिनों में साल भर का प्रदूषण! अगर युद्ध 1 साल चला तो क्या होगा?

ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के महज 14 दिनों (28 फरवरी से 14 मार्च 2026) में इतना कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित हो चुका है, जितना किसी मध्यम आकार के देश जैसे कुवैत पूरे साल में निकालता है।

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लखनऊ/नई दिल्ली, 28 मार्च 2026: ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के महज 14 दिनों (28 फरवरी से 14 मार्च 2026) में इतना कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित हो चुका है, जितना किसी मध्यम आकार के देश जैसे कुवैत पूरे साल में निकालता है। Climate and Community Institute की नई रिसर्च के मुताबिक, इस दौरान 50.55 लाख टन CO₂e (कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष) निकला – जो आइसलैंड के पूरे साल के उत्सर्जन से भी ज्यादा है।

अगर युद्ध इसी रफ्तार से 1 साल तक चला तो कुल उत्सर्जन 13 करोड़ 14 लाख टन CO₂e के आसपास पहुंच जाएगा! यह आंकड़ा 84 सबसे कम प्रदूषण फैलाने वाले देशों के पूरे साल के संयुक्त उत्सर्जन के बराबर है।

कहां से निकला इतना प्रदूषण?

रिसर्च बताती है कि सबसे बड़ा हिस्सा घरों, स्कूलों और इमारतों के ध्वस्त होने से आया – करीब 24 लाख टन CO₂e। इसके बाद तेल भंडारण, रिफाइनरी और टैंकरों पर हमले से 19 लाख टन। जेट, जहाज, मिसाइल और ड्रोन के ईंधन से 5 लाख टन।

तेहरान और आसपास के इलाकों में तेल के आग के धुएं ने "ब्लैक रेन" (काला बारिश) की स्थिति पैदा कर दी। लोग मास्क लगाकर सड़कों पर घूम रहे हैं, हवा में जहरीली गैसें भरी हैं।

1 साल चला तो क्या होगा?

  • जलवायु संकट तेज: इतना CO₂ ग्लोबल वार्मिंग को और बढ़ाएगा। समुद्र स्तर बढ़ना, मौसम चरम, सूखा-बाढ़ बढ़ेगा।
  • स्वास्थ्य खतरा: काला धुआं, सल्फर डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर से सांस की बीमारियां, कैंसर का खतरा।
  • तेल संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया की 20% तेल सप्लाई प्रभावित – भारत जैसे आयातक देशों पर महंगा असर।
  • लंबे समय का नुकसान: रिफाइनरी जलने से मिट्टी-नदी-समुद्र में प्रदूषण दशकों तक रहेगा।


मंत्रिपरिषद की बैठक में PM मोदी की दो टूक, अपने क्षेत्रों में नजर और संपर्क बनाए रखें मंत्री

विपक्ष के हमलों के बीच पीएम मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक की।

नई दिल्ली: कोरोना की दूसरी लहर देश में तांडव मचा रही है। इस बीच सरकारें कोरोना से लोगों को बचाने के लिए लगातार जरूरी कदम उठा रही है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद के सदस्यों से कोरोना प्रबंधन एवं भावी चुनौतियों पर चर्चा की।

पीएम ने सभी से हर स्तर पर नजर बनाए रखने को कहा। कोरोना को 'सदी में एक बार आने वाली त्रासदी' बताते हुए प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र, राज्य और जनता के एकजुट प्रयास से देश यह जंग जीतेगा।


बैठक में दो प्रजेंटेशन दिए गए। इनमें कोरोना संकटके दौरान पिछले 14 महीनों में उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। यह बताया गया कि केंद्र और राज्य मिलकर पूरी स्थिति से निपट रहे हैं। केंद्र हर स्तर पर राज्यों के साथ खड़ा है। गरीबों के लिए दो महीने तक फिर से मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें परेशानी न हो। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बैठक में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर था कि मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों और राज्यों में लोगों के संपर्क में रहें। यह देखें कि केंद्र की ओर से दी गई मदद जरूरतमंद लोगों पहुंच रही है या नहीं। यह वक्त एक टीम की तरह काम करने का है ताकि देश फिर से जंग जीत सके। इस दौरान पीएम मोदी ने  मंत्रियों को इसकी भी याद दिलाई कि कोरोना प्रोटोकाल का पालन करें और दूसरों से भी करवाएं।


कोरोना से जंग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने PM मोदी को भेजा संदेश, मदद का दिया प्रस्ताव

चीन ने भारत को कोरोना के विरुद्ध युद्ध में मदद करने का प्रस्ताव दिया है।

नई दिल्ली: कोरोना के कहर के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद का प्रस्ताव दिया है। इस संबंध में भारत में चीन के राजदूत सुन वेईदोंग ने ट्वीट कर जानकारी दी है।

इससे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को कहा था कि कोविड-19 के खिलाफ जंग में उनका देश भारत की हरसंभव मदद करेगा और कहा कि चीन में बनी महामारी रोधी सामग्री ज्यादा तेज गति से भारत पहुंचाई जा रही हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखे पत्र में वांग ने कहा, ‘‘भारत जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनके प्रति संवेदना रखता है और गहरी सहानुभूति प्रकट करता है।’’

भारत में चीन के राजदूत सुन वेइदोंग ने इस पत्र को ट्विटर पर साझा किया जिसमें लिखा है, ‘‘ कोरोना वायरस मानवता का साझा दुश्मन है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट और समन्वयित होकर इसका मुकाबला करने की जरूरत है। चीनी पक्ष भारत सरकार और वहां के लोगों का, महामारी से लड़ाई में समर्थन करता है।’’


कोरोना से जंग जीतने के साथ ही एक्शन में सीएम योगी, डीआरडीओ अस्पताल का किया निरीक्षण

सीएम योगी कोरोना संक्रमित होने के बावजूद लगातार राज्य में कोरोना के हालात पर नजर बनाए हुए थे।

लखनऊ: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कोरोना को हरा दिया है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। कोरोना से ठीक होने की जानकारी सीएम योगी ने ट्वीट करके दी।

बता दें कि योगी आदित्यनाथ 14 अप्रैल को कोविड-19 से संक्रमित पाए गए थे और इसके बाद से वह सेल्फ आइसोलेशन में थे। इस दौरान वह सभी काम वर्चुअली कर रहे थे। योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा, 'आप सभी की शुभेच्छा और चिकित्सकों की देखरेख से अब मैं कोरोना निगेटिव हो गया हूं। आप सभी के द्वारा मुझे दिए गए सहयोग और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।'


सीएम ने किया अस्पताल का निरीक्षीण

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर टीम-11 के साथ समीक्षा बैठक के बाद अब मैदान में उतर गए हैं। इसी क्रम में वह शुक्रवार को दोपहर में अवध शिल्प ग्राम में बने 400 बेड के कोविड अस्पताल के आइसीयू का निरीक्षण करने पहुंंचे।

लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम प्रांगण में बने डीआरडीओ अस्‍पताल का न‍िरीक्षण करने पहुंचे सीएम योगी आद‍ित्‍यनाथ को आर्मी के अफसरों और डीएम अभ‍िषेक प्रकाश ने DRDO के अस्‍पताल की पूरी जानकारी दी। सीएम ने अस्‍पताल के साथ आइसीयू और प्रशासन‍िक भवन का भी न‍िरीक्षण क‍िया। डीआरडीओ के सूत्रों के अनुसार अस्‍पताल पूरी तरह से मरीजों के उपचार के ल‍िए तैयार है। सभी तरह के ट्रायल पूरे कर ल‍िए गए हैं। अब बस प्रशासन की तरफ से ऑक्‍सीजन उपलब्‍ध कराने का इंतजार है। ऑक्‍सीजन उपलब्‍ध होते ही अस्‍पताल अपनी पूरी क्षमता से काम करने लगेगा।     

बताते चलें कि कोरोना की दूसरी लहर इस समय पीक पर है और प्रतिदिन लगभग 4 लाख केस देशभर से सामने आ रहे हैं। यूपी भी इससे अछूता नहीं है। सैकड़ों लोग प्रतिदिन यूपी में ही कोरोना से मर रहे हैं। इन सबके बीच सूबे की योगी सरकार लगातार कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रही है और हर वह कदम उठा रही है जिससे कोरोना की कमर तोड़ी जा सके।




भारत में कोरोना के दूसरे लहर कहर जारी है। भारत मे कोरोना केसों में दुनियाँ का 40 फीसदी केस हर दिन दर्ज होता है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड 3,86,452 नए कोरोना केस आए 3498 संक्रमितों की जान चली गई है। हालांकि 24 घंटे में 2,97,540 लोग कोरोना से ठीक भी हुए हैं।

 ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड  3,86,452 नए कोरोना केस आए
 3498 संक्रमितों की जान चली गई है। हालांकि 24 घंटे में 2,97,540 लोग कोरोना से ठीक भी हुए हैं।
इससे पहले बुधवार को देश में 379,257 नए केस आए थे

जानिए देश में कोरोना के ताजा हालात
कुल कोरोना केस- एक करोड़ 87 लाख 62 हजार 976
कुल डिस्चार्ज- एक करोड़ 53 लाख 84 हजार 418
कुल एक्टिव केस- 31 लाख 70 हजार 228
कुल मौत- 2 लाख 8 हजार 330
कुल टीकाकरण- 15 करोड़ 22 लाख 45 हजार 179 डोज दी गई
दिल्ली में 1 दिन में सबसे अधिक मौतों का रिकॉर्ड
दिल्ली में कोरोना से होने वाली मौतों में लगातार इजाफा हो रहा है।
गुरुवार को दिल्ली में कोरोना से 395 व्यक्तियों की मौत हुई है।
कोरोना के कारण होने वाली मौतों का यह एक नया रिकॉर्ड है।
.दिल्ली में इससे पहले 1 दिन में इतनी बड़ी संख्या में कोरोना रोगियों की मौत नहीं हुई है।

जहां दिल्ली में कोरोना से 395 कोरोना मरीजों की मौत हुई वहीं, 24235 नए कोरोना मरीज सामने आए हैं।
24 घंटे के दौरान 73,851 कोरोना टेस्ट किए गए थे इनमें से 32.82 फीसदी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इन्हीं 24 घंटों के दौरान दिल्ली में 25,615 कोरोना रोगी स्वस्थ भी हुए हैं।

अब तक 15 करोड़ से जड्यादा कोरोना टीके लगाए गए
देश में 16 जनवरी से कोरोना का टीका लगाए जाने के अभियान की शुरुआत हुई थी।
29 अप्रैल तक देशभर में 15 करोड़ 22 लाख 45 हजार 179 कोरोना डोज दिए जा चुके हैं।
.बीते दिन 22 लाख 24 हजार 548 टीके लगे। वैक्सीन की दूसरी खुराक देने का अभियान 13 फरवरी से शुरू हुआ था।
 1 अप्रैल से 45 साल से ऊपर से सभी लोगों को टीका लगाया जा रहा है। अब 1 मई से 18 से ऊपर के लोगों को भी टीका लगाया जाएगा।
देश में कोरोना से मृत्यु दर 1.11 फीसदी है जबकि रिकवरी रेट करीब 82 फीसदी है। एक्टिव केस बढ़कर 17 फीसदी हो गए। कोरोना एक्टिव केस मामले में दुनिया में भारत का दूसरा स्थान है। कुल संक्रमितों की संख्या के मामले में भी भारत का दूसरा स्थान है। जबकि दुनिया में अमेरिका, ब्राजील, मैक्सिको के बाद सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है।


कई राज्यों में बदल गए लॉकडाउन के नियम, महाराष्ट्र में 15 मई तक मिनी लॉकडाउन

बिहार में तो शाम ४ बजे ही दुकानों को बंद करने का आदेश है।

नई दिल्ली: देश में  तेजी बढ़ रहे कोरोना केस के कारण कई राज्यों ने अपने यहां कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए है। यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने लोगों की सुरक्षा के लिए लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू के लिए नई गाइडलाइंस जारी किए हैं। आइए जानते हैं किस राज्य में क्या प्रतिबंध लगाया है। वहीं महाराष्ट्र सरकार ने अगले 15 दिन के लिए राज्य में मिनी लॉकडाउन लगा दिया है।


यूपी में लॉकडाउन की सीमा बढ़ाई गई

यूपी में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए वीकेंड लॉकडाउन में एक दिन का इजाफा कर दिया गया है। अब यहां शुक्रवार रात 8 बजे से मंगलवार सुबह 7 बजे तक लॉकडाउन रहेगा। इससे पहले शनिवार और रविवार को लॉकडाउन लागू रहता था जबकि नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब सोमवार को भी लॉकडाउन जारी रहेगा। 

इस दौरान सिर्फ जरूरी सेवाओं जैसे मेडिकल शॉप, क्लीनिक, अस्पताल, दूध और सब्जी की दुकानों को ही इजाजत रहेगी। इसके अलावा यूपी के सभी जिलों में रात 8 बजे से सुबह 7 बजे का नाइट कर्फ्यू भी लागू है। बता दें कि यूपी में कोरोना की पॉजिविटी रेट लगभग 30 फीसद हो चुकी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के बड़े शहरों 14 दिन लॉकडाउन लगाने की मांग की थी।

बिहार में लॉकडाउन के नियम


बिहार में नीतीश सरकार ने बुधवार को कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके अनुसार, शाम के 6 बजे से सुबह के 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू रहेगा। इस दौरान पूरे राज्य में धारा 144 लगाने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही शादी समारोह में भी अब अधिकतम 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे वहीं अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 लोग ही शामिल हो सकेंगे। 

नई गाइडलाइंस के मुताबिक शाम 4 बजे तक ही दुकानें खुलेगी। दवा और दूध की दुकानें खुली रहेंगी। औद्योगिक प्रतिष्ठान में निर्माण कार्य जारी रहेंगे। ई-कॉमर्स से जुड़ी सारी गतिविधियां जारी रहेंगी। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी प्रतिष्ठान और गतिविधियां भी जारी रहेगी। ठेले पर फल और सब्जी घूम-घूम कर बेचने की अनुमति है। कृषि और इससे जुड़े कार्य जारी रहेंगे। रेस्तरां और होटल या खाने की दुकान पर रात 9 बजे तक ही खाना घर ले जाने की अनुमति है।

राजस्थान में शाम 6 बजे से सुबह 5 बजे तक वीकेंड कर्फ्यू

राजस्थान में पिछले हफ्ते से एक बार फिर गहलोत सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू की घोषणा कर दी है। इसके तहत शुक्रवार शाम 6 बजे से लेकर सोमवार सुबह 5 बजे तक पूर्ण रूप से वीकेंड कर्फ्यू लागू रहेगा। यह आदेश 25 अप्रैल सुबह 5 बजे से लागू हुए हैं। इस दौरान बाजार शनिवार-रविवार पूर्णतया बंद रहेंगे। सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन में बहुत सी नई पाबंदियों को भी जोड़ा है। 

आदेश के अनुसार सभी खाद्य पदर्थों और किराने के सामान, आटा चक्की, पशुचारे से संबंधित दुकानें सोमवार से शुक्रवार सुबह 6 बजे से 11 बजे तक खुलेंगी। वहीं कृषि आदान विक्रेताओं की दुकानें सोमवार और गुरुवार को सुबह 6 बजे से 11 बजे तक खुलेंगे। डेयरी व दूध की दुकानें रोजाना सुबह 6 बजे से 11 बजे और शाम को 5 बजे से 7 बजे तक खोली जा सकेंगी। जबकि मण्डियां, फल-सब्जियां, फूल मालाएं और सब्जी व फलों के ठेले रोजाना सुबह 6 बजे से दोपहर 11 बजे तक खुली रहेंगी।


मध्य प्रदेश के भोपाल समेत 5 शहरों में तीन मई तक लॉकडाउन

मध्य प्रदेश में भोपाल समेत छिंदवाड़ा, रतलाम, सागर और जबलपुर में जारी पाबंदियों को बढ़ा दिया है। भोपाल में अब तीन मई तक लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लागू रहेंगी। वहीं, छिंदवाड़ा, रतलाम, सागर और जबलपुर में ये प्रतिबंध 1 मई तक के लिए रहेगा। 

गाइडलाइन के अनुसार अनिवार्य सेवाओं को छोड़कर सभी सरकारी और निजी कार्यालय 10 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ ही संचालित होंगे। सामाजिक, राजनैतिक, खेलकूद, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सार्वजनिक तथा धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजनों के लिए लोगों का एकत्रित होना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।


भारत की मदद के बहाने आपदा में ‘अवसर’ खोज रहा चीन

कोरोना का तोहफा देने वाले चीन अब भारत की हर संभव मदद करने की बात कह रहा है।

बीजिंग/नई दिल्ली: कोरोना वायरस की उत्तपत्ति करने वाला और पूरी दुनिया को धोखे में रखने वाला चीन अब कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भारत की मदद करना चाह रहा है। यह मदद है या फिर आपदा को अवसर में बदलने की तरकीब यह तो आने वाला समय ही बताएगा।


दरअसल, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को वादा किया कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के खिलाफ भारत की लड़ाई में उनका देश हर संभव मदद करेगा। उन्होंने कहा कि चीन महामारी के खिलाफ उपयोग होने वाली वस्तुओं को तेजी से भारत पहुंचा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखे पत्र में वांग ने कहा, 'चीनी पक्ष, भारत जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनके प्रति संवेदना रखता है और गहरी सहानुभूति प्रकट करता है।


भारत में चीन के राजदूत सुन वेइदोंग ने इस पत्र को ट्विटर पर साझा किया जिसमें लिखा है, 'कोरोना वायरस मानवता का साझा दुश्मन है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर और समन्वयित होकर इसका मुकाबला करने की जरूरत है। चीनी पक्ष भारत सरकार और वहां के लोगों का, महामारी से लड़ाई में समर्थन करता है।


वांग ने कहा कि चीन में उत्पादित महामारी रोधी वस्तुएं तेजी से भारत में भेजी जा रही हैं ताकि भारत की इस महामारी में मदद की जा सके। उन्होंने कहा, 'चीनी पक्ष भारत की जरूरत के अनुरूप यथासंभव समर्थन और मदद पहुंचाना जारी रखेगा। हमें उम्मीद और भरोसा है कि भारत सरकार के नेतृत्व के अंतर्गत लोग यथा शीघ्र इस महामारी पर काबू पा लेंगे। वांग का पत्र ऐसे समय आया है जब दोनों देशों की सेनाओं की पूर्वी लद्दाख के बाकी बचे तनाव वाले इलाके से वापसी होनी बाकी है। दोनों देशों की सेना फरवरी में पैगोंग झील के इलाके से पीछे हटी थीं।


भारत आनी थी ऑक्सीजन डिवाइस,चीन ने रोकी फ्लाइट


बताते चलें कि चीन की सिचुआन एयरलाइंस ने भारत आने वाली सभी कार्गो फ्लाइट पर अगले 15 दिन के लिए रोक लगा दी है। इन कार्गो फ्लाइट के द्वारा भारत की कई निजी कंपनियां चीन से ऑक्सीजन कान्सेंट्रेटर और कई अन्य जरूरी मेडिकल डिवाइस मंगाने वाली थीं।  सिचुआन एयरलाइंस से जुड़ी कंपनी सिचुआन चुआनहांग लाॅजिस्टिक कंपनी ने कहा है एयरलाइंस ने कुल छह रूट पर अपने कार्गो फ्लाट निलंबित किए हैं। यह चीन की एक सरकारी विमान कंपनी है। इसकी वजह से निजी क्षेत्र द्वारा चीन से कोविड संबंधी मेडिकल सप्लाई मंगाने में काफी अड़चन आएगी। देश में बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए व्यापारियों ने ऑक्सीजन कान्सेंट्रेटर चीन से आयात करने का निर्णय लिया था।


बहरहाल, अब चीन किस तरह से भारत की मदद करता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन जिस तरह से उसने कोरोना वायरस के बारे में दुनिया को अंधेरे में रखा और फिर कोरोना के खिलाफ जंग में लगातार दूसरों की टांगे खीचता रहा वह भारत के लिए किस तरह के ‘संभव’ वाली मदद करेगा यह देखना बाकी है।


चारा घोटाला : CBI कोर्ट ने लालू यादव की रिहाई का जारी किया आदेश

लालू यादव का इलाज फिलहाल एम्स में चल रहा है।

रांची: बिहार के पूर्व सीएम और बहुचर्चित चारा घोटाले के मामले में सजा का रहे लालू प्रसाद यादव को राहत देते हुए उनकी रिहाई का आदेश जारी कर दिया है। रिहाई का आदेश सीबीआई कोर्ट द्वारा लालू की ओर से 10 लाख रुपये जुर्माना राशि कोर्ट में जमा करने के बाद अदालत ने रिलीज आर्डर जारी किया है।


लालू यादव के लिए बेलर के तौर पर निशिकांत और राजू गोप कोर्ट में उपस्थित रहें। लालू यादव चारा घोटाले में सजायाफ्ता थें और उनकी तबियत खराब हो जाने के बाद उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अभी भी लालू यादव एम्स में ही इलाज कराएंगे बस अब वह जेल कस्टडी से बाहर हो जाएंगे। इस बात की जानकारी उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा पहले की दी जा चुकी है। एम्स में वो फिलहाल बिरसा मुंडा जेल के कस्टडी में इलाज करवा रहे हैं।


मुश्किल से भरा गया बेल बॉंड


लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि चाह कर भी हम लोग बेल बांड नहीं भर पा रहे थे। कल शाम को हमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ एक पत्र आया, जिसमें कहा गया कि जिनका बेल हो गया है, उनका बेल बांड अधिवक्ता भर सकते हैं। इसी निर्देश के आलोक में हमने बेल बांड भरा, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। अब रिलीज ऑर्डर जेल पदाधिकारियों के पास चली जाएगी।


17 अप्रैल को दे दी गई थी जमानत


चारा घोटाला मामले में दोषी आरजेडी सुप्रीमो को झारखंड हाई कोर्ट ने इसी महीने की 17 तारीख को सशर्त जमानत दी है। बता दें कि जस्टिस अपरेश सिंह की अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सजा की आधी अवधि पूरी करने के आधार पर लालू प्रसाद यादव को दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में जमानत प्रदान की है।


गौरतलब है कि चाईबासा और देवघर कोषागार से अवैध निकासी मामले में पूर्व में ही लालू प्रसाद यादव को जमानत मिल चुकी है। लालू यादव को कोर्ट ने कई शर्तों के साथ जमानत दी है। इन शर्तों में बिना अनुमति के देश से बाहर ना जाने और अपना पता, मोबाइल नंबर ना बदलने समेत कई शर्तें शामिल हैं।


पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कोरोना को हराया

एम्स से मनमोहन सिंह को मिली छुट्टी।

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमित होने के बाद एम्स में भर्ती कराए गए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को आज अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने कोरोनो का मात दे दी है।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को 19 अप्रैल को एम्स में भर्ती कराया गया था। उनकी कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आई थी। मनमोहन सिंह को दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। सिंह को हल्का बुखार था और जांच में उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी जिसके बाद वह चिकित्सकों की निगरानी में थे।

पूर्व प्रधानमंत्री कोरोना के टीके की दोनों खुराक ले चुके हैं बावजूद इसके वह कोरोना की चपेट में आने से नहीं बच सके। पिछले साल नई दवा के कारण रिएक्शन और बुखार होने के बाद उन्हें को एम्स में भर्ती कराया गया था। कई दिनों के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 से संक्रमित पाए गए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘‘अपने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के उत्तम स्वास्थ्य और जल्द से जल्द उनके ठीक होने की कामना करता हूं।’’ 


कानपुर देहात: जिला अस्पताल से CMO-CMS स्टाफ समेत मिले नदारद, डीएम हैरान, मरीज परेशान

यहां मौके पर ना तो सीएमओ मिले और ना ही सीएमएस। बात दूसरे स्टाफ की करें तो वह भी नदारद ही मिले।

कानपुर देहात: धरती पर डॉक्टर्स को धरती का भगवान कहा जाता है और कोरोना काल में अगर सबसे ज्यादा किसी की जरूरत है तो डॉक्टर्स की। लेकिन कानपुर देहात जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर्स मौज कर रहे हैं। दरअसल, इसका खुलासा तब हो सका जब जिलाधिकारी ने अचानक जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां मौके पर ना तो सीएमओ मिले और ना ही सीएमएस। बात दूसरे स्टाफ की करें तो वह भी नदारद ही मिले।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह गुरुवार को जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने वैक्सीनेशन कराया। वहीं जिला अस्पताल की इमरजेंसी में हो रहे इलाज से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों एवं डॉक्टरों की उपस्थिति व अस्पताल में स्वास्थ्य सम्बंधी मूलभूत सुविधाओं को लेकर उपस्थित डॉक्टरों से वार्ता कर समस्याएं जानीं। ऑक्सीजन सिलेंडर की समस्या को लेकर जहां चिंता प्रकट की, वही ऑक्सीजन सिलेंडर इतनी जल्दी खाली होने की डॉक्टरों द्वारा दी गई जानकारी पर एसडीएम को भाव्या गैस सर्विस के संचालक से वार्ता कर सिलेंडर में कम गैस की आपूर्ति पर संदेह जताया। ड्यूटी में तैनात महिला डॉक्टर ने जिलाधिकारी को बताया कि सेनीटाइजर मार्क्स हैंड ग्लब्स से लेकर अन्य कई प्रकार की समस्याएं आ रही हैं।

सीएमओ डॉ. राजेश कटियार, सीएमएस डॉ. बीपी सिंह बिना डीएम को अवगत कराए काफी समय से लापता चल रहे हैं। वहीं जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। डीएम ने जब उपस्थित रजिस्टर मांगे तो काफी देर बाद उपलब्ध कराये जा सके। जिसमे कई डॉक्टर कई दिनों से नदारद मिले। कुछ डॉक्टर निरीक्षण के समय तक उपस्थित नहीं हो सके। यही हाल अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का रहा। जिला अस्पताल के आधे डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित मिले। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम अकबरपुर राजीव राज को जिला अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता एवं स्टाफ की उपस्थिति संबंधी सारा विवरण तलब किया है। डीएम ने गैरहाजिर स्टाफ पर कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। 

बदहाल स्वास्थ्य विभाग पर जिलाधिकारी का पारा सर चढ़कर बोल रहा था।उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ एफआईआर होगी। वही सीएमओ एवं सीएमएस बिना बताए जिले से नदारद हैं। इस मामले में शासन को अवगत कराते हुए उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।


पुलवामा हमले में घायल सीआरपीएफ जवान अजय कुमार तिवारी की इलाज के दौरान मौत

गुरुवार को जवान का शव पैतृक गांव बलिया पहुंचते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

बलिया। पुलवामा आतंकी हमले में घायल सीआरपीएफ जवान अजय कुमार तिवारी की मौत दिल्ली स्थित पर्क अस्पताल में इलाज के दौरान हो गयी। इसकी सूचना मिलते ही परिजनों सहित इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार को जवान का शव पैतृक गांव बलिया पहुंचते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग अपने लाल की अंतिम झलक पाने को बेताब दिखे।

हल्दी थाना क्षेत्र के बगही गांव निवासी अजय कुमार तिवारी पुत्र स्व. बिंदेश्वरी तिवारी सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर पुलवामा में तैनात थे। 26 नवंबर 2020 को आतंकी हमले में अजय कुमार तिवारी घायल होने के एक सप्ताह बाद कोमा में चले गए थे। उनके ब्रेन का ऑपरेशन पुलवामा में ही किया गया। फिर चिकित्सकों ने उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया, जहां पर्क अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जवान का पार्थिव शरीर दिल्ली से हवाई जहाज द्वारा गुरुवार की सुबह वाराणसी पहुंचा। वहां पहड़िया (वाराणसी) स्थित सीआरपीएफ 95 बटालियन के जवान पार्थिव शरीर लेकर सड़क मार्ग से पैतृक गांव पहुंचे।



ग्रामीणों ने अपनी माटी के लाल को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पत्नी निशा, पुत्री अंजली, पुत्र मोहित व अंकुश का रोते-रोते बुरा हाल था। जवान का अंतिम संस्कार गंगा नदी के हुकुम छपरा घाट पर किया गया, जहां सीआरपीएफ जवानों ने अपने साथी को गार्ड आफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ज्ञानरंजन, एसआई बीके शर्मा, हवलदार अभिमन्यु व राकेश कुमार, पूर्व ग्राम प्रधान संजय कुमार ओझा, समाजसेवी नितेश कुमार सिंह, अवधेश मिश्रा, मुन्ना मिश्रा, गोपाल जी गुप्ता, विजय तिवारी समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।



बेटे को सीने से लगाने की कोशिश करने लगी बूढ़ी मां

95 वर्षीय बूढ़ी मां कौशल्या को जैसे ही पता चला कि उनके जिगर का टुकड़ा अजय अब दुनिया में नहीं रहा, वह टूट गई। उन्हें काठ मार गया। दरवाजे पर रखे बेटे के शव के पास पहुंची बूढ़ी मां उसे सीने से लगाने की कोशिश करने लगी। मां का यह ममत्व देख, वहां उपस्थित हर किसी की आंखों का कोर भींग गया और जुबां से सिर्फ यही आवाज निकली की मां तो मां होती है।विधाता तूने क्या किया।

बताया जा रहा है कि अजय पूरे परिवार के साथ फरवरी 2020 में पैतृक गांव बगही में अपने भतीजे के शादी में आए थे। शादी के बाद अजय मां कौशल्या से कह कर गए थे कि अगली बार आऊंगा तो बेटे मोहित का यज्ञोपवीत संस्कार करूंगा, लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। पत्नी निशा तिवारी एवं बेटी अंजलि तिवारी का तो रोते-रोते बुरा हाल है। बड़े भाई विजय व कृष्ण कुमार को तो काठ सा मार गया है।



कोरोना से जंग: आर्मी चीफ ने PM मोदी से की मुलाकात

सेना द्वारा किए जा रहे कार्यों की दी जानकारी

by News9India

नई दिल्ली: पूरी दुनिया लिए दहसत का पर्याय बन चुके कोरोना के खिलाफ लड़ाई जारी है। खासकर दूसरे लहर के बीच कोरोना अपने पीक पर है और उसे हराने के लिए हर तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं। अब कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश की सेनाएं भी जुट गई हैं। ताजा मामले में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने आज पीएम मोदी से मुलाकात की और सेना द्वारा कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और भविष्य की प्लानिंग के बारे में भी चर्चा की। । ये जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई है। 

जनरल नरवणे ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि सेना जहां संभव हो रहा है वहां अपने अस्पतालों को आम लोगों के लिए खोल रही है, आम नागरिक नकदीकी सैन्य अस्पताल जा सकते हैं। सेना कोविड के मामलों से निपटने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में अस्थायी अस्पताल बना रही है। सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि आयात किए गए ऑक्सीजन टैंकरों और गाड़ियों के प्रबंधन में जहां विशेषज्ञ कौशल की जरूरत पड़ रही है। वहां सेना की ओर से मदद पहुंचाई जा रही है।

वायु सेना प्रमुख भी कर चुके हैं पीएम मोदी से मुलाकात

पीएम मोदी से एक दिन पहले ही वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने मुलाकात की थी और वायु सेना द्वारा कोरोना वायरस के खिलाफ किए जा कार्यों की पूरी जानकारी दी थी। पीएम मोदी और वायु सेना प्रमुख के बीच हुई मुलाकात में ऑक्सीजन टैंकरों और अन्य आवश्यक उपकरणों के परिवहन में सुरक्षा का ध्यान रखते हुए तेजी लाने पर बल दिया गया। वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने पीएम मोदी से मुलाकात की और देश में कोविड-19 की ताजा स्थिति में सुधार के लिए वायु सेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों से उन्हें अवगत कराया।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, "कोरोना से मुकाबले के लिए भारतीय वायु सेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जायजा लिया। वायु सेना, जो देशभर में कई नागरिकों की मदद कर रहा है, कोविड से राहत कार्यों के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केद्रित कर रहा है।"

बयान के मुताबिक, "एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने बताया कि वायुसेना सभी क्षेत्रों को कवर करने के लिए बड़े के साथ-साथ मध्यम आकार के विमानों की तैनाती कर रहा है। प्रधानमंत्री ने ऑक्सीजन टैंकरों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन संचालन की गति तेज करने, उसका स्तर बढ़ाने और उसकी सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।"


देश मे कोरोना का विस्फोट जारी। दूसरी लहर में 24 घंटे में रिकॉर्ड 3645 मरीजों की मौत!

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का क़हर हर दिन तेज।

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का क़हर हर दिन तेज।
 हर दिन कोरोना संक्रमण के मामले और मौत की संख्या रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 379,257 नए कोरोना केस आए और 3645 संक्रमितों की जान चली गई है।
 हालांकि, इस दौरान 2,69,507 लोग कोरोना से ठीक भी हुए। इससे पहले मंगलवार को देश में 360,960 नए केस आए थे।
 इस साल 1 फरवरी को कोरोना के मामले घटकर 8,635 नए कोरोना केस दर्ज किए गए थे।
 एक दिन में कोरोना मामलों की ये संख्या इस साल सबसे कम थी। लेकिन दूसरी लहर ने तोड़े सारे रिकॉर्ड।
जानिए देश में आज कोरोना की ताजा स्थिति क्या है---
कुल कोरोना केस- एक करोड़ 83 लाख 76 हजार 524
कुल डिस्चार्ज- एक करोड़ 50 लाख 86 हजार 878
कुल एक्टिव केस- 30 लाख 84 हजार 814
कुल मौत- 2 लाख 4 हजार 832
कुल टीकाकरण- 15 करोड़ 20 हजार 648 डोज दी गई
महाराष्ट्र में कल 985 लोगों की मौत
महाराष्ट्र में कल कोविड के 63,309 नए मामले आए और संक्रमण से 985 और लोगों की मौत हो गयी. नए मामलों के साथ राज्य में संक्रमितों की संख्या 44,73,394 और मृतक संख्या 67,214 हो गयी है.
पिछले 24 घंटो में राजधानी दिल्ली में बेक़ाबू कोरोना लॉक डाउन के बावज़ूद लॉक नहीं हो रहा है। 
बुधवार को देर रात आंकड़े में बताया गया कि  24 घंटे के अंदर दिल्ली में कोरोना संक्रमण से 368 मौत हुई है और संक्रमण के 25,986 नए मामले सामने आए हैं। 
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक नए मामले सामने आने के बाद दिल्ली में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 99752 हो गई है और 53,819 मरीजों का इलाज घर में आइसोलेशन में किया जा रहा है।
 24 घंटे के अंदर दिल्ली की संक्रमण की दर 31.76 फीसद रही है।
दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को दिल्ली में कुल 81,829 जांच की गई थी। इस समय दिल्ली के अस्पालत में 19,243, कोविड केयर सेंटर में 544 और कोविड हेल्थ सेंटर में 160 मरीज भर्ती है। नए मामले आने के बाद दिल्ली में अब सील क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 33,749 हो गई है। इन 24 घंटे में 20,458 मरीज ठीक होकर वापस अपने घरों को लौटे हैं।


1 मई से 18+उम्र का वैक्सीनेशन, पहले दिन 1.32 करोड़ ने कराया रेजिस्ट्रेशन!

1 मई से 18+उम्र का वैक्सीनेशन, पहले दिन 1.32 करोड़ ने कराया रेजिस्ट्रेशन!


बुधवार 28 अप्रैल से 18 साल से 44 साल के लोगों को भी कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया  शुरू हो चुकी है।
टीकाकरण के लिए पहले दिन ही 1.32 करोड़ लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। लेकिन जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है, उन्हें अभी अपॉइंटमेंट नहीं मिली है। यानी कि उन्हें अभी वैक्सीनेशन की तारीख और टाइम स्लॉट के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
18+ वालों के वैक्सीनेशन के लिए कोविन और आरोग्य सेतु एप के अलावा कोविन पोर्टल पर भी रजिस्ट्रेशन हो रहा है।
लेकिन लोगों का आरोप है कोविन एप पर रजिस्ट्रेशन के दौरान उन्हें कई परेशानी भी हुई हैं।
 इसके अलावा कोविन पोर्टल पर भी काफी दिक्कतों की शिकायत मिलती रही।. कुछ लोगों को ओटीपी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
 इन समस्याओं को लेकर सोशल मीडिया पर कई हैशटैग ट्रेंड होते रहे।
लोगों ने स्क्रीनशॉट भी शेयर किए. कुछ यूजर्स को ये भी मैसेज मिला कि अभी सिर्फ 45+ लोगों का ही रजिस्ट्रेशन हो रहा है।
वेबसाइट और एप में दिक्कत की शिकायत के बाद आरोग्य सेतु ने ट्वीट कर कहा है कि कोविन पोर्टल अब ठीक से काम कर रहा है।
 शाम के चार बजे मामूली दिक्कत आई थी. 18 साल से अधिक उम्र के लोग रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

एक मई से कोविन पोर्टल पर दिखेंगी टीके की कीमतें
इस समय देश में कोरोना की दो वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड उपलब्ध है।
.एक मई से नागरिकों के लिए कोरोना वायरस रोधी टीकों के प्रकार और उनकी कीमतें कोविन पोर्टल पर दिखाई जाएंगी।
18 से 44 उम्र के लोग किसी भी निजी कोविड टीकाकरण केंद्र (सीवीसी) से पैसे देकर टीका लगवा सकेंगे. 45 साल से कम आयु के नागरिक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में किसी भी सरकारी सीवीसी से टीका लगवा सकेंगे।


पश्चिम बंगाल में आठवें और अंतिम चरण का मतदान शुरू हो गया है। अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने डाला वोट।

पश्चिम बंगाल में आज 35 विधानसभा सीटों के लिए लोट डाले जा रहे हैं। लोग सुबह से ही लंबी कतार में खड़े नजर आए।

 
विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने उत्तर कोलकाता के काशीपुर-बेलगछिया के एक मतदान केंद्र पर वोट डाला। उन्होंने कहा, ''इससे पहले इतना शांतिपूर्ण मतदान मैंने नहीं देखा. सुरक्षा के बहुत अच्छे प्रबंध हैं, इसके लिए बधाई देता हूं.''
 इस चरण में टीएमसी और वाम-कांग्रेस गठबंधन के बीच टक्कर होती दिख रही है।  क्या इसका फायदा BJP को होगा इस पर सबकी नजर है।
दरअसल इन सीटों पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है और इस वजह से राजनीतिक दलों की निगाहें अल्पसंख्यक वोट पर टिकी हैं।
आज जिन 35 सीटों पर मतदान होगा उसमें मालदा की 6, बीरभूम की 11, मुर्शिदाबाद की 11 और कोलकाता नॉर्थ की 7 सीट हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद की कुछ सीटों पर पिछले चरण में मतदान हो भी चुका है। 
पिछले चुनाव में भी इन सीटों पर टीएमसी और कांग्रेस का ही वर्चस्व था। टीएमसी के खाते में 17 तो कांग्रेस के खाते में 13 सीटें आई थीं। 
हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान इन सीटों पर भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया था। मालदा और मुर्शिदाबाद में मुसलमान कांग्रेस का समर्थन ज्यादा करते हैं।
इस चरण में तृणमूल के दो मंत्री शशि पांजा और साधन पांडेय श्यामपुकुर और मानिकताला सीट से प्रत्याशी हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद की 17 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है। इस चरण में 84 लाख मतदाता हैं और 283 उम्मीदवार मैदान में हैं। 11860 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और केंद्रीय बलों की 641 कंपनियों को तैनात किया गया है।
भाजपा नेता ने टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर लगाए आरोप
पश्चिम बंगाल: मालदा से भाजपा उम्मीदवार गोपाल चंद्र साहा ने वोट डाला। उन्होंने कहा, ''यहां उम्मीदवार भी सुरक्षित नहीं हैं। TMC के गुंडों ने बहुत से भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की है। कुछ मतदान केंद्र में हमारे मतदान एजेंट को घुसने नहीं दिया जा रहा है।'' बता दें कि पश्चिम बंगाल में पहले के चरणों में हिंसा भी हो चुकी है। पांचवें चरण के दौरान चार लोंगों की मौत हो गई थी


महाराष्ट्र में बेकाबू कोरोना से टूटा 24 घंटे में मौत के सारे रिकॉर्ड! पिछले 24 घंटे में आए कोरोना के 63,309 नए केस। मिनी लॉकडाउन 15 दिन बढ़ना तय।

भारत मे कोरोना की सुनामी की सबसे ज़्यादा मार झेलने वाले प राज्य महाराष्ट्र में कोविड 19 के नए मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी कम होने का नाम नहीं ले रहा।

भारत मे कोरोना की सुनामी की सबसे ज़्यादा मार झेलने वाले प
राज्य महाराष्ट्र में कोविड 19 के नए मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी कम होने का नाम नहीं ले रहा।
पिछले 24 घंटे में 63,309 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं। 
अबतक राज्य में कुल 44,73,394 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं।
राज्य में पिछले 24 घंटे में 985 मरीजों की मौत हुई है। ये एक दिन में कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
 इसी के साथ मृतकों की संख्या राज्य में 67214 हो गई है। राज्य में मंगलवार को 66 हजार 358 नए केस आए थे और 895 मरीजों की मौत हुई थी। सोमवार को 48,700 नए मामलों की पुष्टि हुई थी और 524 मरीजों की मौत हुई थी।
महाराष्ट्र में 18 अप्रैल को सर्वाधिक 68,631 मामले आए थे।
लेकिन मिनी लॉकडाउन के बावज़ूद हालात नहीं सुधरे।


कोरोना के नए मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी को देखते हुए उद्धव ठाकरे की महाराष्ट्र में 30 अप्रैल के बाद भी 15 दिनों के लिए लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों को बढ़ाने का एलान कल कर सकती है।


Covid Vaccination: 18+ उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में मशक्कत!

सर्वर पर लोड बढ़ने से कई बार हुआ क्रैश, ज्यादातर यूजर्स को रेजिस्ट्रेशन में हो रही दिक्कत.

by राजन सिंह

नई दिल्ली: आज शाम 4 बजे से 18 साल से ऊपर के लोगों के वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जैसे ही शुरू हुई, कोविन का सर्वर डाउन हो गया। कोवि प्लेटफॉर्म या आरोग्य सेतु ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन में लोगों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

रजिस्ट्रेशन शुरू, अचानक लोड बढ़ने से कोविन का सर्वर डाउन
वक़्त नहीं है? 18 से 44 उम्र वालों के रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही इन प्लेटफॉर्म्स पर अचानक इतना लोड बढ़ गया है कि सर्वर काम नहीं कर रहा। ज्यादातर यूजर्स के पास यह संदेश आ रहा है कि कोविन सर्वर दिक्कतों का सामना कर रहा है। कृपया थोड़ी देर बाद कोशिश करें। इस बीच कुछ लोग रजिस्ट्रेशन कराने में सफल हुए। कई यूजर्स तो आरोग्य सेतु ऐप के न खुलने की शिकायत कर रहे हैं। उन्हें एरर का मेसेज आ रहा है। एक साथ बड़ी संख्या में लोग रजिस्ट्रेशन के लिए कोशिश कर रहे हैं और सर्वर इतना लोड नहीं उठा पा रहा है। 18 साल से 44 साल के लोग भी 1 मई से कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगवा सकते हैं लेकिन उसके लिए पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। 
दावा- कुछ देर के लिए थी तकनीकी दिक्कत, अब दूर हो गई। आरोग्य सेतु के ऑफिशल ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर बताया गया है कि कोविन पोर्टल काम कर रहा है। 4 बजे एक छोटी सी गड़बड़ी आई थी जिसे दूर कर लिया गया है। 18 साल से ऊपर के लोग रजिस्टर कर सकते हैं। 18 साल से ज्यादा उम्र वाले आज से करा सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन हो रहा, लेकिन नहीं मिल रहा स्लॉट
जिन लोगों का रजिस्ट्रेशन हो भी रहा है, उन्हें वैक्सीनेशन का टाइम स्लॉट अलॉट नहीं हो रहा। अपॉइंटमेंट के लिए उन्हें कुछ देर बार फिर से चेक करने का मेसेज आ रहा है। अब आरोग्य सेतु ऐप के ऑफिशल ट्विटर हैंडल से इसे लेकर तस्वीर साफ की गई है। ट्वीट में बताया गया है कि 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीनेशन का अपॉइंटमेंट तभी संभव होगा जब राज्य सरकारें और प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर वैक्सीनेशन सेशंस शुरू करेंगी।

रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 18 से 44 साल तक की आयु के लोगों के लिए कोविड-19 टीका लगवाने का समय लेना अनिवार्य होगा क्योंकि शुरुआत में सीधे आकर टीका लगवाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, 45 साल से अधिक आयु के लोग अब भी मौके पर पंजीकरण कराकर टीका लगवा सकते हैं। 18 से 44 वर्ष की उम्र वर्ग के लोग किसी भी निजी कोविड टीकाकरण केंद्र (सीवीसी) से भी पैसे देकर टीका लगवा सकेंगे।


सीरम इंस्टीट्यूट ने घटाई कोरोना वैक्सीन की कीमत, जानें; क्या होंगी नई कीमतें

Covishield price for states reduced to INR 300 per dose, says Adar Poonawalla

by राजन सिंह

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनियों में से एक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वैक्सीन की कीमतों को घटाने का ऐलान किया है. कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि उन्होंने राज्यों के लिए तय की गई कीमत 400 रुपये से घटाकर 300 रुपये कर दी है. ताकि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन का लाभ मिल सके. उन्होंने खुद ट्वीट कर ये जानकारी दी. 

अदार पूनावाला का ट्वीट
अदार पूरानाला ने ट्विटर पर लिखा, 'सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की तरफ से परोपकार की भावना के तहत मैं राज्यों के लिए तय की गई वैक्सीन की कीमत 400 रुपये प्रति डोज से घटाकर 300 रुपये प्रति डोज कर रहा हूं. कीमतों में बदलाव तुरंत लागू हो गई हैं. इससे राज्य सरकारों के फंड के सैड़कों करोड़ रुपये बचेंगे, जिससे और भी अधिक लोगों तक वैक्सीन पहुंचाई जा सकेगी, साथ ही अनगिनत जिंदगियों को भी बचाया जा सकेगा.'

सरकार ने की थी दाम करने करने की गुजारिश
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने अपने कोविड-19 टीके 'कोविशिल्ड' की राज्य सरकारों के लिए कीमत 400 रुपये प्रति खुराक घोषित की थी और निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपये प्रति खुराक घोषित की है. दोनों टीके 150 रुपये प्रति खुराक की दर से केंद्र सरकार को उपलब्ध हैं. जिसके बाद केंद्र सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली सभी कंपनियों से दामों में कमीं करने की अपील की थी. इसके बाद ही अदार पूनावाला ने काम करने की घोषणा की है.


क्‍या श‍िवराज सरकार झूठ बोल रही है या फिर शहर के मुख्य श्मशान घाट के आंकड़े? जानें क्‍या है सच्‍चाई

मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. सरकार इन आंकड़ों को ना के बराबर बता रही है, लेकिन दूसरी तरफ शहर के मुख्य श्मशान घाट और कब्रिस्तान के आंकड़ों पर यकीन करें तो तस्वीर अलग ही सामने आ रही है. क्या सरकार मौत के आंकड़ों को छुपाने का काम कर रही है या तो सरकार झूठ बोल रही है या फिर शहर के मुख्य श्मशान घाट के आंकड़े.

21 अप्रैल को 138 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ. भदभदा विश्राम घाट में 92 और सुभाष विश्राम घाट में 33 शवों का अंतिम संस्कार हुआ. झदा कब्रिस्तान में 13 शवों को दफनाया गया. सरकारी आंकड़ों में कोरोना से 5 की मौत बताई गई है. 20 अप्रैल को 148 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था.

यह आंकड़ा रोजाना शहर में कोरोना से मौत होने वाले शवों के अंतिम संस्कार के लिए तय किए गए. भदभदा, सुभाष विश्राम घाट और झदा कब्रिस्तान से आ रहे हैं. इस तरह बढ़ रहा मौत का ग्राफ



-15 अप्रैल को 112 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था.
- 16 अप्रैल को एक दिन में 118 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया था.
- 17 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार, शहर के मुख्य विश्राम घाट और कब्रिस्तान में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत 92 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया था. सरकारी आंकड़ों में कोरोना से 3 मौत होना बताई गई थी.
-18 अप्रैल को 112 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के अंतिम संस्कार साथ किया गया था. सबसे ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार भदभदा विश्राम घाट में किया गया.
-19 अप्रैल को 123 शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया था.
-20 अप्रैल को 148 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था.

मध्य प्रदेश मे जारी कोरोना का कहर
प्रदेश भर में 21 अप्रैल को 13107 कोरोना के नए मामले सामने आए. इंदौर में 1781, भोपाल में 1709, जबलपुर में 789, ग्वालियर मे 1219 कोरोना पॉज़िटिव मरीज मिले. 75 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई. मध्‍य प्रदेश में 82268 एक्टिव मरीज़ों की संख्या हुई. राज्‍य में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अच्छी खबर है. प्रदेश भर में 9035 मरीज़ स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए. इंदौर में 1024, भोपाल 1664, जबलपुर में 437, ग्वालियर में 502 मरीज़ स्वस्थ हुए.