MP में RGPV अब तीन यूनिवर्सिटी में बंटेगी, राजीव गांधी का नाम हटेगा; कांग्रेस ने जताया विरोध

by न्यूज डेस्क

भोपाल: मध्य प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी गई है। अब मौजूदा विश्वविद्यालय को तीन क्षेत्रीय तकनीकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों में बांटा जाएगा। इसके साथ ही नए विश्वविद्यालयों के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी हटा दिया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस पुनर्गठन का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप मजबूत करना, प्रशासनिक व्यवस्था को आसान बनाना और प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का क्षेत्रीय संतुलन बेहतर करना है।

भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में होंगे ३ विश्वविद्यालय

नई व्यवस्था के तहत तीन क्षेत्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाएंगे... भोपाल: मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन: मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर: महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय...भोपाल वाला विश्वविद्यालय मौजूदा RGPV के पुनर्गठन से अस्तित्व में आएगा, जबकि उज्जैन और जबलपुर में मौजूदा स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेजों को नए विश्वविद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। तीनों संस्थानों के संचालन के लिए अलग-अलग कानून बनाए जाएंगे।

संभागों के हिसाब से बंटेगा क्षेत्राधिकार

तीनों विश्वविद्यालयों के अंतर्गत तकनीकी संस्थानों का क्षेत्राधिकार भी अलग-अलग तय किया गया है। भोपाल स्थित विश्वविद्यालय के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग रहेंगे। उज्जैन विश्वविद्यालय में उज्जैन और इंदौर संभाग के तकनीकी संस्थान शामिल होंगे। वहीं जबलपुर विश्वविद्यालय के दायरे में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग आएंगे।

3.83 लाख से ज्यादा छात्रों पर पड़ेगा असर

RGPV प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था का एक बड़ा केंद्र है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान विश्वविद्यालय के तहत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। ऐसे में तीन विश्वविद्यालयों में पुनर्गठन के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और तकनीकी संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था नए ढांचे में आएगी। सरकार ने उज्जैन और जबलपुर के नए विश्वविद्यालयों के लिए कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव और वित्त अधिकारी जैसे प्रमुख पदों के गठन को भी मंजूरी दी है।

राजीव गांधी का नाम हटाने पर कांग्रेस का हमला

विश्वविद्यालय का नाम बदलने के फैसले ने राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया है। कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि सरकार आधुनिक भारत के निर्माण में राजीव गांधी के योगदान को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से राजीव गांधी का नाम हटाने का फैसला स्वीकार्य नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि नाम बदलने से इतिहास नहीं बदला जा सकता। उन्होंने सरकार से विश्वविद्यालय के नाम से राजीव गांधी का नाम नहीं हटाने की मांग की। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा।

सरकार ने बताया क्या है मकसद?

सरकार का कहना है कि RGPV का दायरा काफी बड़ा होने के कारण तकनीकी शिक्षा के संचालन और प्रशासन को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत करने की जरूरत है। तीन अलग-अलग विश्वविद्यालय बनने से विद्यार्थियों और संस्थानों के लिए प्रशासनिक पहुंच आसान होगी तथा स्थानीय जरूरतों के मुताबिक तकनीकी और कौशल शिक्षा को विकसित किया जा सकेगा। इस फैसले के साथ मध्य प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में करीब तीन दशक पुराने RGPV के मौजूदा ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब आगे की प्रक्रिया में नए विश्वविद्यालयों के गठन, अलग-अलग अधिनियम और प्रशासनिक ढांचे को लागू किया जाएगा।