'दखल मत दो, हम खुद देख लेंगे', डॉन-3 विवाद पर रणवीर सिंह का सख्त रुख, 45 करोड़ के दावे पर भी घमासान
by पूजा झा
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और फिल्म 'डॉन 3' के निर्माताओं के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब रणवीर सिंह ने कथित तौर पर साफ कर दिया है कि उनके और फिल्म के निर्माताओं फरहान अख्तर व रितेश सिधवानी के बीच चल रहे इस विवाद में किसी इंडस्ट्री संस्था को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। रणवीर का पक्ष है कि यह मामला मूल रूप से कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े पक्षों के बीच का है और इसका समाधान भी आपसी बातचीत या कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। दूसरी ओर, फिल्म निर्माता इस विवाद को इंडस्ट्री संस्थाओं के सामने ले जा चुके हैं और कथित तौर पर करीब 45 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा कर रहे हैं।
IMPPA से दूरी रखने की मांग
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रणवीर सिंह अपने इस रुख पर कायम हैं कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) या दूसरी इंडस्ट्री संस्थाओं को इस विवाद का फैसला नहीं करना चाहिए। यह घटनाक्रम रणवीर के पिता जगजीत सिंह भवनानी की IMPPA के अधिकारियों से मुलाकात के बाद सामने आया। उन्होंने कथित तौर पर एक्सेल एंटरटेनमेंट की ओर से किए गए 45 करोड़ रुपये के दावे का विरोध करते हुए अपना पक्ष रखा और दस्तावेज जमा किए। फिलहाल IMPPA दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसके बाद ही संस्था आगे की कार्रवाई या किसी फैसले पर विचार करेगी।
रणवीर के वकीलों ने भी उठाए सवाल
सूत्रों के अनुसार, रणवीर सिंह के कानूनी प्रतिनिधियों का तर्क है कि इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट विवाद में FWICE या IMPPA के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठते हैं। उनका मानना है कि विवाद को संबंधित पक्षों के बीच ही सुलझाया जाना चाहिए। हालांकि, फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और निर्माताओं के बीच विवादों को सुलझाने के लिए विभिन्न एसोसिएशन और संस्थाएं लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में रणवीर के इस रुख ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।
IMPPA अध्यक्ष ने क्या कहा?
IMPPA के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने संस्था की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि एसोसिएशन अपने नियमों और अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही काम कर रही है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के वकीलों और कानूनी टीम द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद ही संस्था किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन एसोसिएशन तय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है।
कैसे शुरू हुआ 'डॉन 3' विवाद?
यह विवाद शुरुआत में रणवीर सिंह के फिल्म से अलग होने तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह बॉलीवुड के बड़े इंडस्ट्री विवादों में शामिल हो गया। साल 2023 में रणवीर सिंह को मशहूर 'डॉन' फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म के लिए मुख्य भूमिका में चुना गया था। फिल्म का निर्देशन फरहान अख्तर को करना था, जबकि इसका निर्माण फरहान और रितेश सिधवानी की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया जाना था। हालांकि, बाद में रणवीर सिंह इस प्रोजेक्ट से अलग हो गए। उनके फिल्म से बाहर होने की वजहों को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि रणवीर ने रचनात्मक मतभेद, स्क्रिप्ट और प्रोडक्शन में देरी जैसी वजहों से फिल्म से दूरी बनाई। वहीं, अभिनेता के करीबी सूत्रों का दावा रहा कि रणवीर ने फिल्म खुद नहीं छोड़ी, बल्कि कुछ मुद्दों पर मतभेद के बाद उन्हें प्रोजेक्ट से अलग कर दिया गया।
45 करोड़ रुपये के दावे से बढ़ा विवाद
विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब एक्सेल एंटरटेनमेंट की ओर से कथित तौर पर यह दावा किया गया कि फिल्म की प्री-प्रोडक्शन प्रक्रिया पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। इन खर्चों में विदेशी लोकेशन की तलाश, यात्रा, होटल बुकिंग, तकनीकी तैयारियां और बड़े क्रू से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल होने की बात कही गई। निर्माताओं का दावा है कि रणवीर के प्रोजेक्ट से अलग होने के बाद उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। इसके बाद कथित तौर पर रणवीर सिंह से इस नुकसान की भरपाई की मांग की गई।
क्या हुआ था समझौते का प्रस्ताव?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला इंडस्ट्री संस्थाओं तक पहुंचने से पहले दोनों पक्षों के बीच निजी स्तर पर समझौते की कोशिश भी की गई थी। रणवीर के पक्ष की ओर से कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये तत्काल देने और भविष्य में एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ किसी प्रोजेक्ट में 25 करोड़ रुपये की छूट देने का प्रस्ताव रखा गया था। इस तरह प्रस्तावित समझौते की कुल कीमत करीब 35 करोड़ रुपये बताई गई। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार निर्माताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और विवाद आगे बढ़ता गया।
कई सितारों ने कराई सुलह की कोशिश
मामला बाद में प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौते के लिए कई दौर की बातचीत और मध्यस्थता की कोशिश हुई। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इंडस्ट्री के कई बड़े सितारों और फिल्मकारों ने भी दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश की। हालांकि, तमाम बैठकों और बातचीत के बावजूद 45 करोड़ रुपये से जुड़े विवाद का कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका।
FWICE ने जारी किया था नॉन-कोऑपरेशन निर्देश
विवाद बढ़ने के बाद मामला विभिन्न फिल्म इंडस्ट्री संस्थाओं तक पहुंचा। रिपोर्ट्स के अनुसार, मई में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया था। हालांकि, इसे कई जगह रणवीर पर 'बैन' के रूप में पेश किया गया, लेकिन FWICE ने स्पष्ट किया था कि यह औपचारिक प्रतिबंध नहीं बल्कि नॉन-कोऑपरेशन से जुड़ा निर्देश था। इसके बाद रणवीर सिंह ने FWICE को कानूनी नोटिस भेजकर इस कार्रवाई और विवाद में संस्था के हस्तक्षेप के अधिकार पर सवाल उठाए।
बाद में वापस लिया गया निर्देश
जून में IMPPA, प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और CINTAA के हस्तक्षेप के बाद FWICE ने अपना नॉन-कोऑपरेशन निर्देश वापस ले लिया। संस्था की ओर से कहा गया कि इसका उद्देश्य दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का मौका देना था। हालांकि, निर्देश वापस लिए जाने के बावजूद 45 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय विवाद का समाधान नहीं हो सका।
अब IMPPA के सामने मामला
FWICE का निर्देश वापस लिए जाने के बाद निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने IMPPA के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। निर्माताओं ने अपने कथित 45 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़े दस्तावेज भी संस्था को सौंपे। इसके बाद IMPPA ने रणवीर सिंह से अपना पक्ष रखने को कहा। रणवीर के पिता जगजीत सिंह भवनानी ने एसोसिएशन से मुलाकात कर निर्माताओं के दावे का विरोध किया। अब IMPPA की कानूनी टीम दोनों पक्षों के दस्तावेजों और दावों की जांच कर रही है।
'डॉन 3' से आगे बढ़ चुके हैं रणवीर?
इस पूरे विवाद के बीच रणवीर सिंह अपने नए प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अपनी आगामी फिल्मों और प्रोडक्शन योजनाओं पर फोकस कर रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रणवीर सिंह और एक्सेल एंटरटेनमेंट आपसी बातचीत से इस विवाद को खत्म करेंगे या 45 करोड़ रुपये का मामला कानूनी और संस्थागत लड़ाई में और लंबा खिंचेगा? 'डॉन 3' की कास्टिंग से शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बॉलीवुड में कॉन्ट्रैक्ट, कलाकारों की जिम्मेदारी और इंडस्ट्री संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी बड़ी बहस बन चुका है।