कृष्ण जन्माष्टमी आज, आधी रात में होगा कान्हा का जन्म, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और खास उपाय
by न्यूज डेस्क
देशभर में आज भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट और झांकियों की तैयारी है, वहीं घरों में भी भक्त लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना कर अपना व्रत पूरा करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इसे कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी और कृष्ण जयंती जैसे नामों से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी दिन श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर अवतार लिया था।
रात में इस समय होगी श्रीकृष्ण की पूजा
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात 12 बजे के आसपास की जाती है। इस बार रोहिणी नक्षत्र रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भक्त मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर उनका अभिषेक और श्रृंगार कर सकते हैं। जन्म के समय भगवान की आरती और विशेष भोग लगाने की परंपरा है।
जन्माष्टमी पूजा में ये सामग्री रखें
लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार के लिए बाल कृष्ण की प्रतिमा, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख की जरूरत होती है। इसके अलावा पूजा के लिए चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और फूल रखे जाते हैं। भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत तैयार किया जाता है। इसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल होते हैं। भोग के लिए माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाई रखी जाती है। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल अर्पित करने की भी परंपरा है।
ऐसे करें लड्डू गोपाल का अभिषेक और श्रृंगार
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर उसे सजाएं। लड्डू गोपाल के लिए सुंदर झूला भी तैयार करें। रात में जन्म मुहूर्त के समय सबसे पहले भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से श्रृंगार करें। श्रृंगार पूरा होने के बाद लड्डू गोपाल को झूले में विराजमान करें और उन्हें झूला झुलाएं। इसके बाद माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल चढ़ाएं। अंत में धूप-दीप जलाकर श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।
जन्माष्टमी पर करें इन मंत्रों का जाप
ॐ कृष्णाय नमः।
ॐ देवकीनंदनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः।
ॐ गोकुलनाथाय नमः।
ॐ नमो भगवते श्रीगोविंदाय नमः।
जन्माष्टमी पर किए जाते हैं ये उपाय
केसर वाले दूध से अभिषेक- धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्मोत्सव के बाद लड्डू गोपाल का केसर मिले दूध से अभिषेक करना शुभ होता है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। पान का पत्ता अर्पित करें- जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण को पान का पत्ता चढ़ाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि अगले दिन इस पत्ते पर रोली से श्रीयंत्र बनाकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं। ध्यान दें- पूजा के मुहूर्त और तिथि में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।