सोनिया गांधी की किताब पर बदला प्रकाशक, अब हार्पर कॉलिन्स भारत में करेगा प्रकाशित

by न्यूज डेस्क
सोनिया गांधी की किताब पर बदला प्रकाशक, अब हार्पर कॉलिन्स भारत में करेगा प्रकाशित

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर चल रहा प्रकाशन विवाद अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। किताब के भारत में प्रकाशन की जिम्मेदारी अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया संभालेगा। प्रकाशक ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। किताब की वैश्विक रिलीज 10 नवंबर को प्रस्तावित है। हार्पर कॉलिन्स ने इसे मौजूदा दौर की चर्चित और बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरण पुस्तकों में शामिल बताया है। किताब में सोनिया गांधी के निजी जीवन से लेकर भारतीय राजनीति में उनके लंबे सफर तक के कई अहम पहलुओं को जगह दी गई है।

इटली के बचपन से भारतीय राजनीति तक का सफर

सोनिया गांधी की यह किताब उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को सामने रखेगी। इसमें युद्ध के बाद के इटली में बीता उनका बचपन, भारत आने का फैसला, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ विवाह और इसके बाद भारतीय राजनीति के केंद्र में बिताए गए दशकों का जिक्र होगा। प्रकाशक के मुताबिक, संस्मरण में भारत के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों को सोनिया गांधी के व्यक्तिगत अनुभवों और नजरिए से समझने का अवसर भी मिलेगा।

पेंगुइन से शुरू हुआ था प्रकाशन विवाद

किताब को लेकर विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका स्थित Alfred A. Knopf, जो Penguin Random House का हिस्सा है, ने इसके 10 नवंबर को वैश्विक प्रकाशन की घोषणा की। हालांकि, इसके बाद Penguin Random House India ने साफ किया कि भारत में किताब का प्रकाशन उसकी ओर से नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत में किताब प्रकाशित करने को लेकर पांडुलिपि के कुछ हिस्सों में संपादकीय बदलाव और कुछ अंश हटाने को लेकर चर्चा हुई थी। सोनिया गांधी की टीम इन बदलावों पर सहमत नहीं हुई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रकाशन को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

मोदी, RSS और चीन से जुड़े हिस्सों पर भी उठा सवाल

विवाद के दौरान कांग्रेस नेताओं की ओर से आरोप लगाए गए कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और भारत-चीन संबंधों से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाने का दबाव था। कांग्रेस नेताओं ने इसे बाहरी दबाव से जोड़कर भी सवाल उठाए। हालांकि, Penguin Random House India ने इन आरोपों को खारिज किया था। प्रकाशक का कहना था कि भारत में किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किसी बाहरी दबाव की वजह से नहीं लिया गया। साथ ही, उसने यह स्वीकार किया था कि प्रकाशन को लेकर बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया के साथ करार के बाद किताब के भारत में पाठकों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। सोनिया गांधी की निजी जिंदगी और भारतीय राजनीति के उनके लंबे अनुभवों पर आधारित यह संस्मरण रिलीज से पहले ही राजनीतिक और साहित्यिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।


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