'ब्याज कम करो, वरना रोक दूंगा व्यापार...', डोनाल्ड ट्रंप अपने ही केंद्रीय बैंक को क्यों धमका रहे?
by न्यूज डेस्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में कटौती के लिए दबाव बनाया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरें कम नहीं करता तो अमेरिका उन देशों के साथ कारोबार रोकने पर विचार कर सकता है, जिनके साथ उसका व्यापार घाटा है। ट्रंप ने शुक्रवार, 4 सितंबर को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए फेड से ब्याज दर कम करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को दुनिया के सबसे कम उधारी खर्च वाले देशों में होना चाहिए।
व्यापार रोकने की धमकी कितनी बड़ी बात?
अगर अमेरिका वास्तव में व्यापार घाटे वाले देशों से आयात या कारोबार सीमित करता है, तो इसका असर केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका कई जरूरी उत्पादों और सामानों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने पर कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
इसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि ट्रंप की इस टिप्पणी को सामान्य राजनीतिक बयान के बजाय आर्थिक नीति को लेकर बढ़ते दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
ब्याज दर को लेकर फेड के सामने चुनौती
ट्रंप के लगातार दबाव के बीच फेडरल रिजर्व के सामने भी मुश्किल स्थिति है। अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है तो उस पर राजनीतिक दबाव में फैसला लेने के आरोप लग सकते हैं। वहीं, अगर फेड ट्रंप की मांग को नजरअंदाज करता है तो राष्ट्रपति के साथ टकराव और बढ़ने की आशंका है। फेडरल रिजर्व की अगली बैठक 15 और 16 सितंबर को प्रस्तावित है। ऐसे में ट्रंप के ताजा बयान ने बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।
उम्मीद से बेहतर आया अमेरिकी रोजगार डेटा
ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका की उम्मीद से बेहतर रोजगार रिपोर्ट सामने आने के कुछ ही घंटों बाद आई। अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.62 लाख नई नौकरियां जुड़ने की जानकारी सामने आई, जबकि अर्थशास्त्रियों का अनुमान करीब 53,000 से 55,000 नौकरियों का था। बेरोजगारी दर 4.1 फीसदी पर बनी रही। मजबूत रोजगार आंकड़ों ने फेड के सामने ब्याज दरों में तत्काल कटौती का फैसला और मुश्किल बना दिया है। बाजार में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि केंद्रीय बैंक आगे की नीति में किस दिशा में कदम उठाता है।
ट्रंप क्यों चाहते हैं ब्याज दरों में कटौती?
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से कम ब्याज दरों की वकालत करते रहे हैं। उनका तर्क है कि ब्याज दर कम होने से कंपनियों और आम लोगों के लिए कर्ज लेना सस्ता होगा। इससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज हो सकती है। ट्रंप का यह भी मानना है कि मजबूत आर्थिक विकास का मतलब जरूरी नहीं कि महंगाई अपने आप बढ़े। उनके मुताबिक, अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था कम ब्याज दरों के साथ भी मजबूती से आगे बढ़ सकती है। हालांकि, फेडरल रिजर्व ब्याज दर तय करते समय महंगाई, रोजगार और आर्थिक विकास जैसे कई संकेतकों को ध्यान में रखता है। यही वजह है कि राष्ट्रपति की इच्छा और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति के बीच मतभेद दिखाई दे रहे हैं।
चीन, मेक्सिको और वियतनाम से अमेरिका का बड़ा व्यापार घाटा
अमेरिका का कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ बड़ा व्यापार घाटा है। इनमें चीन सबसे ऊपर है। पिछले साल अमेरिका का चीन के साथ व्यापार घाटा 200 अरब डॉलर से अधिक रहा। इसके बाद मेक्सिको और वियतनाम जैसे देश प्रमुख व्यापार घाटे वाले साझेदारों में शामिल रहे। कुल मिलाकर अमेरिका ने पिछले साल अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा दर्ज किया था। ऐसे में अगर ट्रंप अपनी धमकी को वास्तव में व्यापार नीति का हिस्सा बनाते हैं, तो इसका असर अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नजर फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक पर है, जहां ब्याज दरों को लेकर होने वाला फैसला यह संकेत देगा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव के बीच अपनी मौद्रिक नीति को किस दिशा में ले जाता है।