मॉक संसद में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश, खड़गे बोले- जनता का अधिकार बचाना है

मॉक संसद में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश, खड़गे बोले- जनता का अधिकार बचाना है

नई दिल्ली: चुनाव आयोग की निष्पक्षता और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। इसी बीच शनिवार को इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक सार्वजनिक 'इम्पीचमेंट' की कार्यवाही शुरू की। नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 21 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर आयोजित किया गया, जिसमें अलग-अलग विपक्षी दलों के नेताओं और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उनसे समापन भाषण देने की उम्मीद जताई गई।

खड़गे ने लगाए गंभीर आरोप, बोले- यह लड़ाई जनता के अधिकारों की है

प्रस्ताव पेश करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम करने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था की गरिमा और उसकी निष्पक्षता को बचाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि करीब सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए नोटिस दिया था, लेकिन उन नोटिसों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें खारिज कर दिया गया।

खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा कायम रहना जरूरी है। कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के मतदान के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी मतदाता का नाम उसकी जानकारी के बिना कंप्यूटर के जरिए मतदाता सूची से हटाया जा सकता है?

CEC के खिलाफ विपक्ष ने लगाए छह आरोप

इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने प्रस्ताव में छह प्रमुख आरोप लगाए हैं। इनमें शामिल हैं:

चुनावों में कथित धांधली की साजिश रचने का आरोप।

करीब 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप।

संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव करने का आरोप।

ECINET के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण स्थापित करने का आरोप।

अन्य दो चुनाव आयुक्तों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करने का आरोप।

विपक्ष का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के नाम पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। इसी को लेकर इंडिया ब्लॉक लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। हालांकि, ये सभी विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

बीजेपी का पलटवार, संबित पात्रा ने नेहरू का किया जिक्र

विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वोट चोरी की बात करनी है, तो इसका इतिहास भी देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश में वोट चोरी की शुरुआत पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय हुई थी। पात्रा ने कांग्रेस के आंतरिक नेतृत्व चयन का जिक्र करते हुए कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल को अधिक समर्थन मिलने के बावजूद नेहरू प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने नेहरू को 'निर्वाचित नहीं हुए प्रधानमंत्री' भी बताया। इस बयान के जरिए बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़कर कांग्रेस पर ही सवाल उठाए।

बारिश के कारण टला था कार्यक्रम, अब रामलीला मैदान में रैली

इंडिया ब्लॉक का यह कार्यक्रम पहले शुक्रवार को आयोजित होना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के चलते इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया था। अब इस प्रतीकात्मक कार्यवाही के अगले दिन यानी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की बड़ी रैली प्रस्तावित है। इस रैली में SIR, कथित वोट चोरी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। दरअसल, विपक्ष की इस पूरी मुहिम का केंद्र चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकार हैं। वहीं, बीजेपी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बता रही है।

अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग पर उठ रहे इन सवालों का जवाब किस तरह सामने आएगा और क्या इस राजनीतिक टकराव के बीच मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर कोई ठोस समाधान निकल पाएगा?


न्यूज़ डेस्क